केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को मौखिक आश्वासन दिया है कि 29 अक्टूबर तक रेस कोर्स मस्जिद के खिलाफ कोई विध्वंस कार्रवाई नहीं की जाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद को संभावित विध्वंस से संरक्षण देने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद के इमाम ने कहा कि मस्जिद पर विध्वंस का आसन्न खतरा स्पष्ट रूप से मंडरा रहा है। प्रवेश और निकास में बाधा है। इमाम और अन्य नमाजियों को मस्जिद में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मस्जिद की बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं, जिससे वहां नमाज अदा करने में परेशानी हो रही है।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि मस्जिद की बिजली और पानी के कनेक्शन काटना मस्जिद आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सुरक्षा जोखिम से बचने के लिए था। सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि फिलहाल किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी और 29 अक्टूबर तक यथास्थिति बनी रहेगी।
इमाम के वकील ने दलील दी कि यह मस्जिद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार ग्रेड-2 विरासत मान्यता के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड इस संपत्ति का स्वामी नहीं है, लेकिन फिर भी इसका संरक्षण जरूरी है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और इसे बचाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या वक्फ बोर्ड के पास इस मामले में कुछ कहना है? कोर्ट ने कहा कि वे संपत्ति के संरक्षक हैं। आखिरकार आप केवल एक उपासक या नमाजी हैं। यदि संपत्ति के स्वामी के पास समझौते नहीं हैं, तो हमें देखना होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है, जिसमें विरासत का दर्जा, वक्फ बोर्ड की भूमिका और सुरक्षा कारण शामिल है।
रेस कोर्स इलाके में स्थित यह मस्जिद काफी पुरानी है और इसके आसपास के क्षेत्र में पुनर्विकास को लेकर चर्चा चल रही है। स्थानीय लोगों और नमाजियों में इसे लेकर चिंता बनी हुई है कि कहीं मस्जिद को हटा न दिया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी, तब तक केंद्र सरकार ने किसी भी विध्वंस कार्रवाई पर रोक का आश्वासन दिया है।
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