N1Live National देवशयनी एकादशी पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक लगाकर अद्भुत शृंगार, चार महीने शिव करेंगे सृष्टि का संचालन
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देवशयनी एकादशी पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक लगाकर अद्भुत शृंगार, चार महीने शिव करेंगे सृष्टि का संचालन

On Devshayani Ekadashi, Baba Mahakal is adorned with a magnificent *shringar* featuring the Vaishnava *tilak*; Lord Shiva will govern the universe for the next four months.

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवशयनी एकादशी) पर शनिवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आज से चार महीने के लिए भगवान विष्णु राजा बलि को दिए वचन का पालन करने पाताल लोक चले जाते हैं। इस दौरान चातुर्मास में सृष्टि के संचालन और संरक्षण का दायित्व बाबा महाकाल संभालते हैं।

देवशयनी के पावन अवसर पर तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलने पर बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। भस्म आरती में बाबा का विशेष वैष्णव तिलक लगाकर अद्भुत शृंगार किया गया और उन्हें बेलपत्र व मखाने की माला अर्पित की गई। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म रमाई गई। इन चार महीनों में मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं, जबकि कथा, भागवत और चातुर्मास जैसे धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा अनवरत चलती रहती है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि देवशयनी एकादशी को लेकर सनातन की दो मान्यताएं हैं। पहली मान्यता यह है कि आज से भगवान विष्णु चार महीने के लिए विश्राम के लिए चले जाते हैं, तब पृथ्वी का पूरा भार भगवान शिव को दे दिया जाता है। भगवान शिव चार महीने तक भक्तों का कल्याण करते हैं। इसी वजह से महाकालेश्वर मंदिर में उत्सव मनाया जाता है। अब चार महीने मांगलिक कार्य नहीं होंगे, जबकि इन चार महीनों में धार्मिक कार्य किए जाते हैं।”

पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि इस दौरान ऋषि-मुनि चातुर्मास करते हैं। सनातन धर्म के लोगों को पुण्य मिल सके, इसके लिए भक्तों की ओर से कथा और भागवत कराया जाता है। दूसरी मान्यता यह है कि राजा बलि को भगवान विष्णु ने पाताल लोक में चार महीने रहने का वचन दिया था, जिस वजह से भगवान विष्णु शयन व्यवस्था को लेकर चार महीने तक पाताल लोक में चले जाते हैं। इस धार्मिक परंपरा का महाकाल मंदिर में निर्वाह किया जाता है।

महेश शर्मा ने बताया कि भगवान को विश्राम कराना और फिर विश्राम के बाद भार देने की प्रथा महाकालेश्वर मंदिर की ही प्रथा है। यहां की यह परंपरा सनातन के लिए विशेष है, जिसका निर्वहन यहां के पुजारियों की ओर से किया जाता है।

देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर यूपी के जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने विश्व कल्याण की कामना की। आईएएनएस से बातचीत करते हुए रामकेश निषाद ने कहा, “बाबा महाकालेश्वर की दिव्य भस्म आरती में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भस्म आरती, दर्शन और समग्र कार्यक्रम की व्यवस्था वास्तव में मेरे लिए प्रेरणादायक है। बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती में शामिल होने वाले सभी भक्त अपने परिवार, अपने समुदाय और राष्ट्र की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं।”

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