March 9, 2026
National

रमजान के 19वें दिन शिया समुदाय ने निकाला गिलीम का जुलूस, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

On the 19th day of Ramadan, the Shia community held a procession of Gilim, with tight security.

9 मार्च । रमजान के 19वें दिन शिया समुदाय की ओर से पारंपरिक ‘गिलीम’ का जुलूस निकाला गया। यह ऐतिहासिक जुलूस कूफा मस्जिद से शुरू होकर इमामबाड़ा तकी जैदी पर संपन्न हुआ। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच निकले इस जुलूस में लगभग 20,000 लोग शामिल हुए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि ड्रोन और छतों पर तैनात सुरक्षाबलों के जरिए पूरे मार्ग की निगरानी की गई।

डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि यह रमजान के 19वें दिन का जुलूस है, जिसे गिलीम जुलूस के नाम से भी जाना जाता है। सादातगंज से शुरू होकर चौक और पाटा नाला होते हुए यह जुलूस लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय करता है। आमतौर पर इसमें 15,000 से 20,000 लोगों की भीड़ देखी जाती है। उन्होंने बताया कि शिया समुदाय की ओर से निकाला गया महत्वपूर्ण जुलूस है।

डीसीपी ने जानकारी दी कि हर साल की तरह इस साल भी पुलिस की व्यापक व्यवस्था की गई है। हमें मुख्यालय से भी फोर्स मिला है, कमिश्नरेट से भी फोर्स मिला है। जोन सेक्टर व्यवस्था के तहत 10 एडिशनल एसपी की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें आगे-पीछे एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी हैं। तीन भागों में इसको बांटा गया है। डिप्टी एसपी स्तर के तीन अधिकारी लगाए हैं। इसके अलावा 10 कंपनी पीएसी और दो कंपनी आरएएफ की भी तैनाती की गई, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

बता दें कि शिया समुदाय में गिलीम जुलूस एक महत्वपूर्ण धार्मिक जुलूस है, जो मुख्य रूप से रमजान के महीने में निकाला जाता है, खासकर 19वीं रमजान को। यह जुलूस पहले शिया इमाम हजरत अली इब्ने अबी तालिब (अ.स.) की शहादत की याद में निकाला जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 19 रमजान को जब कूफा की मस्जिद में नमाज के दौरान इब्ने मुलजिम ने हजरत अली पर तलवार से हमला किया था, तब घायल अवस्था में उन्हें जिस ‘गिलीम’ (कंबल) में रखकर घर लाया गया था, यह जुलूस उसी मंजर की याद दिलाता है।

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