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पुरानी सफलता का बोझ लेकर नहीं करनी चाहिए एक्टिंग, फिल्में अपने आप बनती हैं क्लासिक : सौरभ शुक्ला

One should not act carrying the burden of past success, films become classics on their own: Saurabh Shukla

31 मार्च । फिल्म इंडस्ट्री में अगर किसी कलाकार का किरदार फैंस के बीच हिट हो जाए, तो उस पर आगे वैसा ही काम दोहराने का दबाव बढ़ जाता है। कई कलाकार इस दबाव के चलते अपने अगले प्रोजेक्ट्स में खुद को सीमित कर लेते हैं। इस पर दिग्गज अभिनेता सौरभ शुक्ला का मानना है कि असली कलाकार वही होता है, जो अपने पिछले काम का बोझ लेकर नहीं चलता बल्कि हर नए किरदार को पूरी तरह नए अनुभव की तरह जीता है।

आईएएनएस ने बातचीत के दौरान जब सौरभ शुक्ला से पूछा कि क्या यादगार भूमिकाएं निभाने के बाद कलाकार पर एक अलग तरह की जिम्मेदारी आ जाती है। इस पर उन्होंने कहा, ”कलाकार को अपने पुराने किरदारों या उनकी सफलता का दबाव नहीं लेना चाहिए। अगर कोई कलाकार हर नए काम में यह सोचकर जाता है कि उसे अपने पिछले काम से बेहतर करना है या उसी स्तर को बनाए रखना है, तो वह अपने काम का आनंद नहीं ले पाएगा।”

अपनी बात को समझाने के लिए सौरभ शुक्ला ने क्रिकेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ”सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ी हर गेंद को खेल का हिस्सा मानकर खेलते हैं। वे इस बात के दबाव में नहीं रहते कि उन्हें अपने पुराने रिकॉर्ड्स को दोहराना है। इसी तरह, एक कलाकार को भी हर नए किरदार को बिना किसी दबाव के निभाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, ”जब कोई कलाकार अभिनय करता है, तो उसे अपने पुराने काम का बोझ साथ लेकर नहीं चलना चाहिए। कलाकार को बस इस बात की खुशी होनी चाहिए कि उसे कुछ नया बनाने का मौका मिल रहा है। हर किरदार एक नया अनुभव होता है और उसे उसी तरह से जीना चाहिए। अगर कलाकार जुनून के साथ काम करेगा, तो उसका प्रदर्शन अपने आप बेहतर हो जाएगा।”

उन्होंने कहा, ”क्लासिक फिल्में कभी भी योजना बनाकर नहीं बनाई जाती। जब कोई कलाकार ईमानदारी से और दिल से काम करता है, तो वही काम आगे चलकर क्लासिक बन जाता है।”

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