N1Live National जिसमें निपुणता, दूसरों को सिखाने की क्षमता हो, उसे ही श्रेष्ठ शिक्षकों की श्रेणी में स्थान दिया जाना चाहिए: पीएम मोदी
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जिसमें निपुणता, दूसरों को सिखाने की क्षमता हो, उसे ही श्रेष्ठ शिक्षकों की श्रेणी में स्थान दिया जाना चाहिए: पीएम मोदी

Only those who have expertise and the ability to teach others should be placed in the category of best teachers: PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संयुक्त क्रिया (कम्पाउंड वर्ब) को लेकर संस्कृत सुभाषित शेयर किया।

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “कंपाउंड वर्ब (संयुक्त क्रिया) का अर्थ है- एक शब्द की विशेषता को उससे जुड़े दूसरे शब्द में स्थानांतरित कर देना या जोड़ देना। जिस व्यक्ति में ये दोनों गुण हों, उसे ही शिक्षक के कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक ‘श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता । यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।।’ साझा किया।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि कुछ लोग स्वयं किसी कार्य को करने में बहुत निपुण होते हैं, जबकि कुछ अन्य लोग उस ज्ञान या कौशल को दूसरों तक बहुत अच्छी तरह पहुंचाने में विशेष योग्य होते हैं। जिस व्यक्ति में ये दोनों गुण, खुद में निपुणता और दूसरों को सिखाने की क्षमता, निहित हों, उसे ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की श्रेणी में सबसे आगे स्थान दिया जाना चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने 29 मई को सुभाषित शेयर किया था। पीएम मोदी ने विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण को लेकर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था कि विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण हैं। इन गुणों के साथ ही आज देशवासी विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में निरंतर जुटे हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।’ संस्कृत श्लोक भी साझा किया था।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि तेजस्विता, क्षमाशीलता, अदम्य धैर्य, आचरण की पवित्रता, राष्ट्र के प्रति निष्कपट भाव तथा अहंकाररहित व्यक्तित्व ये सभी गुण दैवी संपदा को प्राप्त व्यक्तित्व के लक्षण कहे गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री की ओर से गुरुवार 28 मई को भी सुभाषित शेयर किया गया था। उन्होंने लिखा था कि महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक वीर सावरकर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन! वीरता और बौद्धिकता से भरा उनका व्यक्तित्व देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।

पीएम ने ‘अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः।।’ श्लोक साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि संसार में अनेक लोग केवल ज्ञान या केवल शक्ति के लिए प्रसिद्ध होते हैं, किंतु वास्तव में वे धीर गंभीर व्यक्तित्व अत्यंत विरले होते हैं जो ज्ञान और पराक्रम दोनों से युक्त हों।

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