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विपक्षी सांसदों ने सरकार से की मांग, सदन में पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर हो चर्चा

Opposition MPs demand that the government hold a discussion in the House on issues concerning paper leaks, Ram Mandir offerings, and students.

संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की है। समाजवादी पार्टी (सपा), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने इन मुद्दों पर सदन में व्यापक चर्चा कराने की मांग करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने पेपर लीक विरोधी कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने कहा कि जब तक कानून लागू करने वाले अधिकारी और प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई तक की पूरी प्रक्रिया ईमानदार लोगों के हाथों में नहीं होगी, तब तक गड़बड़ियां होती रहेंगी। उनके अनुसार, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।

रामगोपाल यादव ने राम मंदिर चढ़ावा दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला देश और विदेश में भगवान राम में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा है, लेकिन अब तक दान और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर निर्माण के लिए मिले धन का उपयोग किस प्रकार हुआ और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि 1990 में एलके आडवाणी की राम रथ यात्रा के दौरान लोगों ने बड़ी मात्रा में धन, गहने और अन्य कीमती वस्तुएं दान की थी लेकिन उन फंडों का भी समुचित हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंची है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने संसद के संचालन को लेकर सत्ता पक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है। उनके अनुसार, जब भी विपक्ष के सांसद नियम 267 के तहत नोटिस पर चर्चा की मांग करते हैं, सदन स्थगित कर दिया जाता है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सरकार सदन को सुचारु रूप से चलने देगी ताकि महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके।

महुआ माजी ने पेपर लीक विरोधी विधेयक पर भी गंभीर विमर्श की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और कई छात्रों ने मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या तक कर ली।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया तथा कई छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने मांग की कि सरकार आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लेने के अपने वादे को पूरा करे और ऐसा कानून बनाए जिसमें निर्दोष लोगों को सजा न मिले।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि आंदोलन के दौरान किस प्रकार पुलिस ने बल प्रयोग किया और महिलाओं के साथ भी कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं, इसलिए इस विषय पर संसद में विस्तृत बहस होना आवश्यक है।

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