N1Live Entertainment ओटीटी ने उन कलाकारों को भी दिया सम्मान, जिन्हें फिल्मों में नहीं मिलती थी जगह: मनोज बाजपेयी
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ओटीटी ने उन कलाकारों को भी दिया सम्मान, जिन्हें फिल्मों में नहीं मिलती थी जगह: मनोज बाजपेयी

अभिनेता मनोज बाजपेयी इन दिनों नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम ‘गजब रात’ को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। इस बीच उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में मनोरंजन की दुनिया में ओटीटी प्लेटफॉर्म की अहमियत को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ओटीटी ने कलाकारों के लिए नए रास्ते खोले हैं। खासकर उन अभिनेताओं को इसका बड़ा फायदा मिला है, जिन्हें मुख्यधारा की फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखाने के मौके नहीं मिल पाते थे। आज उन्हें पहचान और सम्मान भी मिल रहा है।

आईएएनएस से बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा, ‘उन अभिनेताओं को देखिए, जिन्हें पहले सही मायने में काम ही नहीं मिल पाता था। पुरुष कलाकारों को भी मुख्यधारा की फिल्मों में पर्याप्त मौके नहीं मिलते थे। अब ओटीटी पर उन्हें इतना सम्मान मिल रहा है। उनकी जिंदगी बेहतर तरीके से चल रही है। उन्हें जो किरदार मिल रहे हैं, उनकी वजह से वे अपनी जिंदगी में कुछ हद तक सुकून और स्थिरता महसूस कर पा रहे हैं।”

मनोज ने मनोरंजन जगत में आ रहे बदलावों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ओटीटी के आने के बाद काम मिलने की प्रक्रिया काफी तेज और नियमित हुई है। उन्होंने कहा, ”इस पूरे बदलाव को करीब से देखने वाले व्यक्ति के तौर पर मैं कहूंगा कि ओटीटी के आने के बाद चीजें बहुत तेजी से और लगातार होने लगी हैं।”

बता दें कि फिल्म ‘सत्या’ में भीखू म्हात्रे के किरदार से मनोज बाजपेयी को खास पहचान मिली। इसके बाद ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में सरदार खान और ‘अलीगढ़’ में प्रोफेसर रामचंद्र सिरास के किरदार में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। फिल्म ‘भोंसले’ में एक उम्रदराज पुलिस कांस्टेबल की भूमिका निभाकर भी उन्होंने दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। ‘शूल’, ‘स्पेशल 26’, ‘ट्रैफिक’, ‘सत्यमेव जयते’, ‘डायल 100’ और ‘इंस्पेक्टर झेंडे’ जैसी फिल्मों में वह पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आए हैं।

ओटीटी की दुनिया में मनोज बाजपेयी की वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ काफी चर्चित रही है। इसमें उन्होंने खुफिया अधिकारी श्रीकांत तिवारी का किरदार निभाया।

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