जम्मू-कश्मीर की एक मासूम आदिवासी बच्ची के साथ एक शिक्षक की दरिंदगी और फिर उसकी मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 20 अगस्त को इस दिल दहला देने वाली वारदात का खुलासा होने के बाद घाटी में आक्रोश है। अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है, जहां ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने इंसाफ की लड़ाई तेज कर दी है। फाउंडेशन के जनरल सेक्रेटरी और जवाहरलाल यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. नसीब अली ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए मांग की है कि आरोपियों पर सिर्फ पॉक्सो ही नहीं, बल्कि एससी/एसटी एक्ट के तहत भी कड़ी कार्रवाई हो।
जेएनयू के असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन के जनरल सेक्रेटरी डॉ. नसीब अली ने कहा, “मुझे बोलते हुए भी शर्मिंदगी मसूस हो रही है कि वो दरिंदा एक शिक्षक था जिसने उस बच्ची के साथ इस तरह की हरकत की। 20 अगस्त के बाद जब ये सामने आया कि बच्ची के साथ पहले इस तरह की दरिंदगी होती रही और वो इस दुनिया से चल बसी, तो पूरे जम्मू कश्मीर में एक शोक की लहर थी। तब जाकर जम्मू कश्मीर में एक आवाज उठी। ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन ने 23 अगस्त को शेड्यूल ट्राइब कमीशन में एक अर्जी दायर की।”
डॉ. नसीब ने कहा कि इस अर्जी में ये बोला गया कि वो मासूम बच्ची अनुसूचित जनजाति से थी और वो टीचर इस तबके का नहीं था। उसी वक्त ट्राइबल गुज्जर बकरवाल वेलफेयर फाउंडेशन के एक सदस्य खबीर साहब के द्वारा अर्जी लगाई गई। ठीक दो दिन बाद शेड्यूल ट्राइब कमीशन में एक नोटिस आया। हमारा कहना ये है कि जो भी धाराएं लग रही हैं, उसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत धारा भी लगनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि तीन दिन के बाद लगभग वो धारा भी लग गई। मैं शुक्रगुजार हूं। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने क्राइम ब्रांच को भेज दिया है। अब उसमें छह लोग हैं; पहले तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई, फिर दो की हुई और फिर किसी एक की हुई।
जेएनयू के सहायक प्रोफेसर ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टरों ने जिस तरह से उस बच्ची को रिसीव नहीं किया, फिर किश्तवाड़ डोडा लेकर जाया गया और फिर जम्मू की ओर लेकर जा रहे थे। इस पूरे मामले में 30-40 लोग शामिल हैं। अभी गिरफ्तारियां 5-6 हुई हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां होंगी। गिरफ्तारी के बाद एक मिसाल कायम होगी कि इस तरह की दरिंदगी करने वालों को ऐसी सजा मिले कि बच्चियों के साथ ऐसा करने से पहले सोचे।

