हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 13 सितंबर 2026 (रविवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि, सुबह 7:08 बजे तक है। इसके बाद तृतीया हो जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार (वराह जयंती) की पूजा करनी चाहिए। श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध का पाठ करना और विष्णु सहस्रनाम का जाप करना बहुत शुभ फलदायी रहेगा।
रविवार सुबह 6:16 बजे सूर्योदय और शाम 6:29 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 8:03 बजे चंद्रोदय और शाम 7:47 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि दोपहर 1:06 बजे तक हस्त नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
रविवार को दोपहर 1:43 बजे तक शुक्ल योग रहेगा, इसके बाद ब्रह्म योग शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 7:03 से 8:40 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल शाम 4:57 बजे से 6:29 बजे और गुलिक काल दोपहर 3:25 से 4:57 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 12:22 से शाम 1:54 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
रविवार को इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

