पंथिक नेताओं ने बुधवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि उसने गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के मुद्दे को एसजीपीसी का आंतरिक मामला बताया है।पंथिक नेता मोहकम सिंह, मनजीत सिंह भोमा और सतनाम सिंह ने कहा कि स्वरूपों का मुद्दा पूरे खालसा पंथ से संबंधित है और इसे किसी एक संगठन तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि एसजीपीसी नेतृत्व इस मामले में अपने राजनीतिक आकाओं के साथ-साथ समिति के पदाधिकारियों को लगातार बचाने की कोशिश कर रहा है।
नेताओं ने अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज से अपील की कि वे कानून को अपना काम करने दें और इस मामले में एसजीपीसी का बचाव न करें।
उन्होंने कहा कि पंथ-प्रेमी लोगों के बढ़ते दबाव के बाद ही राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम से एसजीपीसी और सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के भीतर उथल-पुथल मच गई।

