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रांची में धरनास्थल पर अंधेरे में पहुंची पुलिस, भाजपा नेताओं का आरोप- ‘छात्रों को जबरन हटाने की हुई कोशिश’

Police arrived at the Ranchi protest site in the dark; BJP leaders allege an attempt to forcibly remove the students.

जेपीएससी में अनियमितता के खिलाफ रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के धरना स्थल पर देर रात हलचल देखने को मिली। आरोप है कि पुलिस के अधिकारी अंधेरे में छात्रों को धरनास्थल से हटाने के लिए पहुंचे थे। हालांकि, अधिकारियों के पहुंचने की खबर मिलते ही भाजपा विधायक राज सिन्हा समेत कई नेता भी मौके पर पहुंच गए थे।

अपनी मांगों को लेकर छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास अपना धरना दे रहे हैं। हालिया विधानसभा मार्च के बाद देर रात प्रदर्शन स्थल पर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां देखी गईं। बताया गया कि धरना स्थल पर देर रात अधिकारियों, छात्र नेताओं और नेताओं के बीच बातचीत का दौर चला। इस दौरान, विधानसभा मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम और छात्रों के आंदोलन को लेकर स्थिति पर चर्चा की गई। फिलहाल, छात्र अपनी मांगों को लेकर अब भी धरना स्थल पर डटे हुए हैं।

भाजपा विधायक राज सिन्हा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि प्रशासन छात्रों को डराने-धमकाने आया था और रात में विरोध-प्रदर्शन वाली जगह को खाली कराने की कोशिश कर रहा था। हम यह देखने आए कि क्या हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि प्रशासन को इतना कमजोर नहीं होना चाहिए कि वह अंधेरे की आड़ में छात्रों को हटाने की कोशिश करे। अगर वे छात्रों को हटाना चाहते हैं या कोई कार्रवाई करना चाहते हैं, तो उन्हें दिन के उजाले में आकर ऐसा करना चाहिए। रात में छात्र कहां जाएंगे?

भाजपा नेता अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाए कि पुलिस अधिकारी यहां छात्रों को जबरन हटाने आए। वे उन्हें बलपूर्वक हटाने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कहा, “आपको यह समझना होगा कि रात के समय ऐसा करना और इस तरह लोगों को डराने-धमकाने की कोशिश करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। यह एक लोकतांत्रिक देश है और आप इस तरह से व्यवहार नहीं कर सकते। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे।”

भाजपा के पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि यहां आकर छात्रों पर दबाव बनाना, खासकर रात के समय, ऐसा काम है जो मुझे लगता है कि अंग्रेजों ने भी नहीं किया होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि छात्र अकेले हैं। कल उनके साथ लाखों लोग थे। आज उन पर दबाव बनाना प्रशासन की गलती होगी।

छात्र नेता राजेश प्रसाद ने कहा, “यहां एसएसपी, एसपी और डीसी समेत पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने धरना स्थल का दौरा किया। सबसे पहले, वे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिले और उनके नाम व घर के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। बातचीत के बाद डीसी बाहर आए और जेएसएससी सीजीएल के उम्मीदवारों को बुलाया। उन्होंने सीजीएल अभ्यर्थियों से सवाल जवाब किए।”

राजेश प्रसाद ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल को रद्द किए जाने की हमारी मांग उचित है और इसका एक आधार भी है। यह आधार भी सीआईडी की तरफ से तैयार किया गया, लेकिन इसे कोर्ट में जमा नहीं किया गया था। छात्र नेता ने कहा कि सरकार से हमारा यही अनुरोध है कि हमारी मांग को धरातल पर उतारें और सीआईडी की रिपोर्ट में दर्ज लोगों के बयानों को दाखिल करें।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने अपने बयान में कहा कि वे प्रदर्शन स्थल पर असामाजिक तत्वों को देखने आए थे। सिटी एसपी पारस राणा ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग, जिनकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई थी, यहां मौजूद हैं, इसलिए हम उनकी पहचान की पुष्टि करने और जांच करने आए थे। हम कुछ छात्रों से मिलने भी आए थे।”

सीओ शिव शंकर पांडे ने आईएएनएस से कहा, “हम यहां सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए आए कि भीड़ में कोई असामाजिक तत्व तो नहीं घुस आया है और कोई गड़बड़ तो नहीं कर रहा है।” सीओ शिव शंकर पांडे ने यह भी बताया कि पुलिस छात्रों की एक प्रोफाइल भी बनाना चाहती है, जिसमें उनके नाम और पते हों, ताकि छात्र खुद भी किसी भी अवांछित तत्व पर नजर रखने में मदद कर सकें और जिला प्रशासन के लिए भी स्थिति पर नजर रखना आसान हो जाए। हमारे आने का यही मकसद है।

उन्होंने कहा कि डीसी और एसपी भी यहां पहुंचे थे। वे सिर्फ निरीक्षण करने के लिए यहां पहुंचे थे। शिव शंकर पांडे ने कहा कि यह छात्रों और हमारी जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन स्थल पर असामाजिक तत्व और शराबी न पहुंचें। इसी उद्देश्य से हम लोग यहां पहुंचे।

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