March 27, 2026
Entertainment

सिर्फ विलेन बनकर नहीं, गंभीर और भावात्मक किरदार निभाकर प्रकाश राज को मिली पहचान, कभी पैदल काम के लिए भटकते थे अभिनेता

Prakash Raj gained recognition not just for his villainous roles but for portraying serious and emotional characters. The actor once wandered on foot in search of work.

27 मार्च । ‘आली रे आली, आता तुमची बारी आली’ यह डॉयलाग सुनते ही जयकांत शिखरे का खूंखार चेहरा सामने आता है, जिसका किरदार प्रकाश राज ने सिंघम में निभाया था।

इस फिल्म में अपने किरदार को इम्प्रोवाइज करने के लिए अभिनेता ने हाथ हिलाकर अपने गुस्से को जाहिर कर बॉडी लैंग्वेज को बदल लिया था, जबकि वो सीन का हिस्सा भी नहीं था। उनकी इसी लगन की वजह से प्रकाश राज को न सिर्फ हिंदी, बल्कि दक्षिण सिनेमा का बड़ा विलेन कहा जाता है।

26 मार्च को जन्मे प्रकाश राज का असली नाम प्रकाश राय है। हालांकि, फिल्मों में आने के बाद डायरेक्टर की सलाह के बाद उन्होंने राय को राज कर लिया था, और यही नाम उनकी असली पहचान बन गया। अभिनेता के लिए करियर की शुरुआत करना भी आसान नहीं था। प्रकाश फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आते, यही कारण रहा है कि पहले काम की तलाश में वे पैदल एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो चक्कर लगाते थे। फिल्मों और सीरियल में आने से पहले प्रकाश थिएटर कलाकार थे। थिएटर में काम करके वह प्रति माह 300 रुपए कमाते थे। हालांकि, थिएटर के बाद अभिनेता को धीरे-धीरे दक्षिण भारतीय भाषाओं में सीरियल मिलने लगे।

कन्नड़ भाषी होने के बाद भी अभिनेता ने मलयामल, तेलुगू और तमिल भाषाओं में काम किया। भले ही शुरुआती दिनों में उन्हें भाषाओं को लेकर कठिनाई झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सभी भाषाओं को बारीकी से सीखा और आज खुद सभी भाषाओं की डबिंग करते हैं। प्रकाश राज को तमिल सिनेमा में ब्रेक ‘ड्युएट’ से मिला। इस फिल्म में पहले से ही बड़े चेहरे मौजूद थे, लेकिन अभिनेता ने सभी के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और अपने अभिनय से फैंस का दिल जीता, जिसके बाद वह विलेन के तौर पर उभरे। उन्होंने ‘घिल्ली’, ‘पोकिरी’, और ‘ओक्काडु’ में अपने अभिनय से सबको डरा दिया।

हिंदी सिनेमा में भी उनकी छवि खूंखार विलेन की रही। उन्हें जितनी भी फिल्में ऑफर हुईं, उसमें उनका किरदार निगेटिव था। साल 2009 में पहली बार उन्हें ‘वॉन्टेड’ से बॉलीवुड में विलेन के तौर पर एंट्री मिली और फिर ‘सिंघम’, ‘सिंघम रिर्टन’, ‘बुढ्डा होगा तेरा बाप’, ‘दबंग-2’, और ‘हीरोपंति’ जैसी फिल्मों से विलेन की छवि को और मजबूत किया।

अभिनेता ने टाइपकास्ट न होते हुए सिनेमा में गंभीर और भावुक किरदार भी किए और लोगों ने उन किरदारों को भी बहुत प्यार दिया। तमिल फिल्म ‘अभियुम नानुम’ और तेलेगु फिल्म ‘आकाशमन्ता’ में उन्होंने पिता का किरदार निभाया था, जो अपनी बेटी के लिए जीता है। फिल्म ‘धोनी’ में भी उनके द्वारा निभाए गए पिता के रोल को देखकर फैंस भावुक हो गए थे। उन्होंने हर भावना को पर्दे पर अच्छे से प्रदर्शित किया था।

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