20 मार्च । अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के.टी. परनायक ने गुरुवार को कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित बुनियादी ढांचे के मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए और आवश्यक सुविधाओं को लगातार बनाए रखना चाहिए।
राज्यपाल ने यह बात उस समय कही, जब त्सेरिंग नक्सांग, जो अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेटरी कमीशन के अध्यक्ष हैं, ने ईटानगर स्थित लोक भवन में उनसे मुलाकात की।
राज्यपाल ने मजबूत शैक्षणिक नियमन पर जोर देते हुए आयोग को सलाह दी कि प्रवेश प्रक्रिया की करीबी निगरानी की जाए, ताकि पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने परीक्षा और शोध मानकों पर भी कड़ी नजर रखने को कहा, जिससे संस्थानों की विश्वसनीयता और शैक्षणिक ईमानदारी बनी रहे।
उन्होंने दोहराया कि निजी संस्थानों को बुनियादी ढांचे के नियमों का पालन करना होगा और शिक्षण के लिए जरूरी सुविधाओं को लगातार बनाए रखना होगा।
शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने पर चिंता जताते हुए राज्यपाल ने आयोग को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकार के नियमों के अनुरूप सख्त गुणवत्ता नियंत्रण लागू करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि आयोग को संस्थानों के कामकाज की नियमित समीक्षा करनी चाहिए, नियमों के पालन को सुनिश्चित करना चाहिए और गुणवत्ता शिक्षा बनाए रखने के लिए उन्हें जवाबदेह बनाना चाहिए। राज्यपाल ने यह भी कहा कि जो संस्थान बार-बार मानकों को पूरा करने में विफल रहें, उनके खिलाफ मान्यता निलंबित करने या उन्हें बंद करने जैसे कदम उठाने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की सख्त निगरानी राज्य में उच्च शिक्षा के भविष्य को मजबूत बनाने और छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप प्रतिस्पर्धी व विश्वसनीय शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस दौरान एपीपीईआईआरसी के सदस्यों ने विभागीय स्तर पर लंबित कई मुद्दों से राज्यपाल को अवगत कराया। राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को संबंधित अधिकारियों के साथ उठाया जाएगा और जल्द समाधान के लिए आवश्यक चर्चा की जाएगी।
इस बैठक में आयोग के सदस्य लिमो एते, जोरम अनिया और सचिव ए.के. त्रिपाठी भी मौजूद रहे, जिन्होंने आयोग की गतिविधियों और पहलों की जानकारी दी।
वहीं, राज्यपाल ने पूर्व विधायक तलोंग तग्गु के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके निधन से राज्य ने अपने शुरुआती दौर के उन नेताओं में से एक को खो दिया है, जिन्होंने अरुणाचल प्रदेश की लोकतांत्रिक नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


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