नीट पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अन्य घोटालों के खिलाफ 24 जुलाई को कोलकाता में निकाली गई विरोध रैली के दौरान पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हमले और हिंसा के मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। अधिकारियों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी।
इससे पहले, शनिवार शाम से रविवार दोपहर तक हिंसा के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पहचान कर 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
सोमवार सुबह गिरफ्तार किए गए दो लोगों की पहचान दक्षिण-पूर्व कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके के करया निवासी वकार आज़म (35) और कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके गार्डन रीच निवासी जावेद अख्तर (32) के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को आज बाद में कोलकाता की निचली अदालत में पेश किया जाएगा। सरकारी वकील अदालत से उनकी पुलिस हिरासत की मांग करेंगे।
इन सभी आरोपियों के खिलाफ हाल ही में लागू किए गए ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछले हफ्ते इसकी घोषणा की थी। इस कानून में असामाजिक और हिंसक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
24 जुलाई की दोपहर नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कुछ छात्र व युवा संगठनों की संयुक्त रैली के दौरान तनाव फैल गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिसकर्मियों पर कांच की बोतलें, पत्थर, ईंटें, बांस की लाठियां और जूते फेंके।
इस घटना की कवरेज कर रहे कुछ मीडियाकर्मी भी प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा फेंकी गई चीजों की चपेट में आकर घायल हो गए। इनमें से कुछ मीडियाकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। रविवार दोपहर को मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से कोई भी छात्र नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर पहचान के बाद गिरफ्तार किए गए लोग कथित तौर पर कट्टरपंथी थे। उनके अनुसार, शुक्रवार को विरोध रैली में शामिल होने के बाद छात्र कार्यकर्ताओं का रूप धारण कर शहर में अशांति फैलाना उनका मुख्य उद्देश्य था।
मुख्यमंत्री ने रविवार दोपहर मीडिया से बात करते हुए कहा, “उनका एकमात्र उद्देश्य राज्य और देश में शांति भंग करना था। इन सभी लोगों के खिलाफ हाल ही में लागू किए गए ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

