March 16, 2026
Entertainment

पुनीत राजकुमार: बचपन से शुरू हुआ अवॉर्ड जीतने का सिलसिला, फिर बने कन्नड़ सुपरस्टार

Puneeth Rajkumar: Award-winning streak began as a child, then became a Kannada superstar

16 मार्च । बड़े पर्दे पर गरीबों की मदद करने वाले कई अभिनेता मसीहा बनकर छा गए, लेकिन दक्षिण भारत के एक ऐसे सुपरस्टार थे, जिन्होंने असल जिंदगी से लेकर अपनी मृत्यु के बाद भी चार लोगों को दुनिया को देखने की शक्ति दी।

हम बात कर रहे हैं सुपरस्टार पुनीत राजकुमार की। अभिनेता की 17 मार्च को 51वीं जयंती है।

चेन्नई में जन्मे अभिनेता को एक्टिंग विरासत में मिली थी। उनके पिता दक्षिण भारत के जाने-माने अभिनेता थे और मां ने भी कई फिल्मों का निर्माण किया था। अभिनेता ने छोटी उम्र में ही सिनेमा में कदम रख अपने टैलेंट से सबको हैरान कर दिया। जहां सालों-साल मेहनत के बाद भी किसी अभिनेता के लिए अवॉर्ड पाना मुश्किल होता है, वहीं राजकुमार ने बाल कलाकार के रूप में ही कई अवॉर्ड अपने नाम कर लिए थे। पुनीत ने साल 1980 से पर्दे पर बाल कलाकार के तौर पर डेब्यू किया।

उन्हें सबसे पहले ‘वसंत गीता’ में देखा गया, जिसके बाद उन्होंने ‘भाग्यवंता’, ‘चालीसुवा मोदागालु’, ‘एराडु नक्षत्रगालु’, और ‘बेट्टादा हूवु’ में अपने अभिनय से सबका दिल जीत लिया। इतना ही नहीं, अभिनेता को ‘बेट्टादा हूवु’ में रामू की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था, और फिल्म ‘चालीसुवा मोदागालु’ के लिए भी उन्हें कर्नाटक राज्य बाल कलाकार पुरस्कार मिला था।

पुनीत राजकुमार की गिनती इन मेगास्टार में होती है, जिन्होंने न सिर्फ कन्नड़ बल्कि तमिल और तेलुगू भाषाओं में भी काम किया। उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर 29 फिल्मों में काम किया था, जिनमें ‘अप्पू’, ‘वीरा कन्नडिगा’, और ‘अभि’ सबसे सफल फिल्मों में शामिल थीं। इन फिल्मों में अभिनेता ने सबसे ज्यादा फीस लेने का भी रिकॉर्ड बनाया।

खास बात यह भी है कि अभिनेता की मां ने उनके करियर को ऊंचाईयों तक पहुंचाने के लिए कई फिल्मों की कहानियों का लेखन और निर्माण भी किया। पुनीत राजकुमार की मां पार्वतीम्मा ने ‘अप्पू’, ‘जैकी’, ‘अन्ना बॉन्ड’, और ‘अरसु’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया था, जो राजकुमार के करियर की सफल फिल्में रही। हालांकि 47 साल की उम्र में अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

फिट अभिनेता होने के बाद भी उनका निधन हृदयघात की वजह से हुआ। उनके पिता डॉ. राजकुमार का निधन भी हृदयघात की वजह से हुआ था। अभिनेता के पिता ने साल 1994 में ही पूरे परिवार के नेत्र दान करने का फैसला लिया था। जब पुनीत राजकुमार का निधन हुआ था, तब 6 घंटों के भीतर उनकी आंखों के कॉर्निया को विभाजित कर चार लोगों को नेत्रदान किया गया था।

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