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पंजाब का बजट ‘माताओं और बहनों के साथ बड़ा विश्वासघात’: अश्वनी शर्मा

Punjab budget a 'big betrayal of mothers and sisters': Ashwani Sharma

8 मार्च । पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने रविवार को कहा कि राज्य का बजट ‘राज्य की माताओं और बहनों के साथ बड़ा विश्वासघात है और किसानों, कर्मचारियों और आम जनता के लिए भी निराशाजनक है।’

2026-27 के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने यहां मीडिया से कहा कि 16 मार्च, 2022 को गठित आम आदमी पार्टी की सरकार 16 मार्च को चार साल यानी 48 महीने पूरे कर लेगी। उन्होंने कहा कि बजट में कुल 260,437 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रस्तावित है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का अनुमान 980,635 करोड़ रुपए लगाया गया है तथा विकास दर 10 प्रतिशत अनुमानित है।

उन्होंने कहा कि अगर भगवंत मान सरकार वाकई महिलाओं के प्रति संवेदनशील होती, तो उसे बजट में यह प्रावधान करना चाहिए था कि पिछले चार वर्षों से उन्हें एकमुश्त 48,000 रुपए दिए जाएं, जो 1,000 रुपए प्रति माह के हिसाब से दिए जाने चाहिए थे।

शर्मा ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को 1,000 या 1,500 रुपए देने की घोषणा तो की है, लेकिन इसके लिए पूरा बजट आवंटित नहीं किया है। इस योजना के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता है, जबकि बजट में केवल 9,300 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि इसके अलावा, सरकार ने इस योजना के लिए पंजीकरण की शर्त लगा दी है। जिस तरह 10 लाख रुपए की स्वास्थ्य बीमा योजना का पंजीकरण अभी तक पूरा नहीं हुआ है, उससे साफ है कि इस योजना का पंजीकरण भी लंबे समय तक लंबित रहेगा और महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि किसानों को भी धोखा दिया गया है क्योंकि चुनावी वादों के बावजूद सभी 24 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित नहीं किया गया है और न ही इसकी कोई कानूनी गारंटी दी गई है।

शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत आने वाली धनराशि को अपनी बता रही है। लगभग 15,000 करोड़ रुपए की सड़क परियोजनाएं केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत हैं। गरीबों के लिए बनाए जा रहे मकान, अमृत 2.0 के तहत 3,504 करोड़ रुपए, और स्कूलों में नए क्लासरूम और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी केंद्र सरकार की धनराशि से ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बजट में स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मचारियों के हितों की भी अनदेखी की गई है, जिससे जनता में निराशा है।

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