March 31, 2026
Punjab

140 लाख मीट्रिक टन उत्पादन की संभावना वाले गेहूं कटाई सीजन से पहले पंजाब ने तेल आपूर्ति की तत्काल मांग उठाई, केंद्र तुरंत कार्रवाई करे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

Punjab expresses urgent demand for fuel as 140 lakh metric tonnes of wheat harvest nears, seeks immediate action from the Centre: Chief Minister Bhagwant Singh Mann

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारत सरकार से पेट्रोल, डीजल और डीएपी खाद की बढ़ी हुई तथा निर्बाध आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब 140 लाख मीट्रिक टन गेहूं की कटाई के लिए तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकती है।

लोगों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं है और घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कटाई और अनाज की ढुलाई को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समय पर कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए 181 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 139 लाख मीट्रिक टन धान उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शुक्रवार शाम को प्रधानमंत्री के साथ एक वर्चुअल बैठक के दौरान मैंने बताया कि इस वर्ष पंजाब में 140 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन की संभावना है। फसल की सुचारु कटाई और ढुलाई सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोल और डीजल की नियमित आपूर्ति बेहद आवश्यक है। कटाई के दौरान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर, ट्रॉलियां, हार्वेस्टर और ट्रक इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए व्यापक जनहित में तेल आपूर्ति बढ़ाई जानी चाहिए। यह समय की मांग है कि देश की खाद्य सुरक्षा हर हाल में बरकरार रखी जाए।”

लोगों को भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस समय राज्य में 12 से 14 दिनों का पेट्रोल और डीजल तथा लगभग छह दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है, जो सामान्य रूप से पूरे वर्ष समान रहता है। आपूर्ति लगातार जारी है। देश के 41 देशों के साथ आयात समझौते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल तथा 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक पहले से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि जमाखोरी या घबराहट में खरीदारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मुख्य सचिव स्वयं आपूर्ति पर नजर रख रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “गुरुवार तक एलपीजी रीफिल के लिए 71,000 अनुरोध प्राप्त हुए थे, जिनमें से 69,000 की डिलीवरी की जा चुकी है। राज्य में किसी भी प्रकार के लॉकडाउन की कोई संभावना नहीं है और सभी कार्य सामान्य रूप से चल रहे हैं। कुल 1,497 स्थानों पर जांच की गई, जिसमें 301 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कृषि और उद्योग दोनों को किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े। एलपीजी, पेट्रोल और डीजल से संबंधित समस्याओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-3321001 शुरू किया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “वर्तमान स्थिति में पंजाब अपने गोदामों से 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं देने के लिए तैयार है, जबकि इस वर्ष 140 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद है। इसके अलावा, देश की सेवा के लिए पंजाब 139 लाख मीट्रिक टन धान उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार है। राज्य ने हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों की मदद की है। यदि देश को 181 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 139 लाख मीट्रिक टन धान की आवश्यकता है, तो इसे किसी भी समय उठाया जा सकता है। पंजाब इस समय भी देश का साथ देने की अपनी गौरवशाली परंपरा को बनाए रखेगा।”

तेल कीमतों के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, “पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त कर कम करने का निर्णय विश्वास बढ़ाने वाला कदम है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को प्राथमिकता के आधार पर डीएपी खाद की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि पंजाब में धान की बुवाई 1 जून से शुरू हो रही है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी रीफिल की प्रतीक्षा अवधि को 45 दिनों से घटाकर शहरी क्षेत्रों के बराबर 25 दिन किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “वर्चुअल बैठक के दौरान मैंने पंजाब से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। मैंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे कूटनीतिक माध्यमों का सक्रिय रूप से उपयोग करें, ताकि देश को किसी भी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। भले ही हम ‘विश्व गुरु’ बनने का दावा करते हैं, लेकिन आवश्यक संसाधनों को सुरक्षित करने में आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता ही हमारी वास्तविक ताकत को दर्शाती

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