पंजाब सरकार द्वारा पोषण अभियान के तहत लाभार्थियों की पहचान के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) मॉड्यूल का उपयोग करने हेतु 28,515 स्मार्टफोन खरीदने में हुई देरी के कारण लगभग 12 लाख लाभार्थी पूरक पोषण से वंचित हो सकते हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पिछले वर्ष जून से पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन और एफआरएस मॉड्यूल का उपयोग अनिवार्य कर दिया था। इसका उद्देश्य प्रत्येक लाभार्थी की पहचान करना था ताकि फर्जी लाभार्थियों को हटाया जा सके।
इस अभियान के लिए स्मार्टफोन हासिल करने में पंजाब और पश्चिम बंगाल ही पीछे हैं। केंद्रीय मंत्रालय के नियम के अनुसार हर चार साल में स्मार्टफोन बदलने की अनुमति है, इसलिए कई राज्यों ने दूसरी बार स्मार्टफोन बदलवाने का लाभ भी उठाया है।
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत शुरू की गई इस योजना के तहत, लाभार्थियों की निगरानी के लिए स्मार्टफोन खरीदने हेतु राज्य के सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग को लगभग 27 करोड़ रुपये (केंद्र सरकार का 60% हिस्सा) आवंटित किए गए थे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, छह साल बाद भी स्मार्टफोन की खरीद नौकरशाही और राजनीतिक दांव-पेच में फंसी हुई है।
विभाग ने स्मार्टफोन खरीदने का जिम्मा पंजाब इन्फोटेक को सौंपा है।
पंजाब आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ की हरगोबिंद कौर ने कहा, “स्मार्टफोन न होने के कारण, लाभार्थियों की जानकारी लेने के लिए कर्मचारियों को सालाना मात्र 1,000 रुपये का फोन रिचार्ज दिया जा रहा था। चूंकि सभी कर्मचारियों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, इसलिए लाभार्थियों की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है।”
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में सरकार ने 4G स्मार्टफोन के लिए बोलियां मंगाई थीं, लेकिन बेहतर तकनीक का हवाला देते हुए आवश्यकता को 5G उपकरणों में बदल दिया गया। इससे स्मार्टफोन खरीदने की लागत लगभग 34 करोड़ रुपये (राज्य की 40% हिस्सेदारी सहित) से बढ़कर लगभग 60 करोड़ रुपये हो गई। पंजाब सरकार ने अतिरिक्त लागत वहन करने का निर्णय लिया। 5G स्मार्टफोन खरीदने का निर्णय कुछ वर्गों द्वारा व्यक्त की गई आपत्तियों के बावजूद लिया गया, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के आधे हिस्से में 5G कनेक्टिविटी पर्याप्त नहीं थी।
सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि स्मार्टफोन की खरीद का मुद्दा संबंधित विभाग के समक्ष उठाया गया है।

