March 24, 2026
National

राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक को संवैधानिक अधिकारों पर खुला हमला बताया

Rahul Gandhi called the Transgender Amendment Bill a blatant attack on constitutional rights.

24 मार्च । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को टांसजेंडर समुदाय के लोगों से मिले। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ की तीखी आलोचना की और इसे समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर खुला हमला बताया।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भाजपा सरकार का यह प्रतिगामी विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों से अपनी पहचान स्वयं तय करने का अधिकार छीन लेता है, जो सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एनएएलएसए फैसले का सीधा उल्लंघन है। यह पूरे भारत में विभिन्न समुदायों की विविध सांस्कृतिक पहचान को मिटा देने वाला कदम है। विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के सामने अमानवीय जांच से गुजरने के लिए मजबूर करता है और बिना किसी सुरक्षा उपाय के आपराधिक दंड व निगरानी की व्यवस्था लागू करता है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय से कोई परामर्श नहीं किया और ऐसा विधेयक लाई है जो उन्हें सुरक्षा देने के बजाय कलंकित करता है।

राहुल गांधी ने कहा, “संविधान हर भारतीय के जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा के अधिकार की रक्षा करता है। लेकिन भाजपा सरकार अपने संकीर्ण विचारों को पूरा करने के लिए संविधान का उल्लंघन कर रही है और ट्रांसजेंडर समुदायों का सम्मान करने वाले भारत के समृद्ध इतिहास को नष्ट कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का स्पष्ट रूप से विरोध करती है।”

यह विधेयक 13 मार्च 2026 को लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा पेश किया गया था। 2019 के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित करने, स्व-पहचान के अधिकार को हटाने और मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के बाद ही पहचान प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान करता है। सरकार का तर्क है कि 2019 का कानून अस्पष्ट था और इसका दुरुपयोग हो रहा था, इसलिए स्पष्ट परिभाषा और मजबूत प्रक्रिया जरूरी है।

लेकिन विपक्ष और ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने विधेयक को ‘संवैधानिक हमला’ और ‘प्रतिगामी’ करार दिया है। कई संगठनों ने कहा कि यह एनएएलएसए फैसले की भावना के खिलाफ है, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्व-पहचान का अधिकार दिया गया था।

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