लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख की बिना प्रकाशित पुस्तक का हवाला दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। सरकार ने किताब का नाम पूछने के साथ ही सवाल उठाया कि राहुल गांधी जिस किताब का जिक्र कर रहे हैं, क्या वह प्रकाशित हुई है? इसको लेकर हंगामा हुआ और फिर सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। सोमवार को संसद सत्र खत्म होने के बाद तमाम नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण मसला उठाया। वह भी सेना के सर्वोच्च पद पर रहे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है। सारे देश को जानना चाहिए कि सरकार चीन के सामने नतमस्तक क्यों है? राज्यसभा में भी यही बात कही गई, लेकिन लोकसभा में क्यों नहीं कहने दिया गया? वह तो देश के हित के बारे में बात कर रहे थे।
वहीं किरेन रिजिजू के बयान पर उन्होंने कहा कि 1959–60 के समय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उस समय की घटना की संसद भवन में जानकारी दी थी और सबको बोलने का अवसर दिया था। आज तो किताब का नाम लेने से पहले ही रोक दिया गया। सरकार को चर्चा करानी चाहिए। यह चर्चा तो छोड़िए, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भी नहीं बोलने दे रहे हैं। अगर जनरल नरवणे ने कुछ कहा है, तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। देश की सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। गर्व है कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि तमाम किताबों और अखबारों का जिक्र किया जाता है, तब उन्हें क्यों नहीं रोका जा रहा है?
वहीं सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि सदन से जुड़े नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। 1947 में जब पाकिस्तान के साथ संघर्ष हुआ, तो संसद भवन में इसकी चर्चा हुई थी। 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान भी संसद भवन के दोनों सदनों में चर्चा हुई थी। यह चर्चा लगभग एक हफ्ते तक चली थी। 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध को लेकर भी राष्ट्रपति ने सदन में इसकी जानकारी दी थी। ऐसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी ही चाहिए।
वहीं दिग्विजय सिंह के ‘लोकतंत्र खतरे में है’ वाले बयान पर भाजपा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव है। उन्हें अमर्यादित और अव्यावहारिक बातें नहीं करनी चाहिए। वह उस पार्टी से आते हैं, जिसने लोकतंत्र की हत्या की। उनकी पार्टी ने आपातकाल लगाया था। मुझे लगता है उन्हें इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अपने आकाओं को खुश करने के लिए वह इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।
वहीं भाजपा सांसद मयंक कुमार नायक ने कहा कि भारत की जनता ने, जिसके हाथ में लोकतंत्र को सुरक्षित समझा है, उसे जिम्मेदारी दे दी है। जनता की अदालत सबसे बड़ी है। उसी अदालत ने भाजपा और एनडीए को संसद में पहुँचाया है। उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेनी चाहिए।
राहुल गांधी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक किताब का जिक्र कर अपनी बात रखने की कोशिश की। लोकसभा अध्यक्ष ने टोकते हुए कहा कि इस किताब का जिक्र नहीं हो सकता। वह जो बात कहना चाहते थे, वह सही नहीं थी। सदन के पटल पर देश का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा था, इसलिए उन्हें रोका गया होगा।

