कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार “नशीली दवाओं की जनगणना” के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जिसका उनके अनुसार किसी भी वास्तविक नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद आम आदमी पार्टी (आप) के घटते जनसमर्थन का आकलन करने और सत्ता बरकरार रखने की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से किया गया एक राजनीतिक सर्वेक्षण मात्र है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पंजाब के शिक्षकों को एक राजनीतिक सर्वेक्षण का हिस्सा बनाया जा रहा है। शिक्षकों को स्कूलों और कक्षाओं से हटाकर इस प्रशासनिक कार्रवाई में लगाने से शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
रणधावा ने सरकार पर प्रशासनिक संसाधनों का दुरुपयोग करने और करदाताओं के पैसे को राजनीतिक हितों के लिए खर्च करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काम पंजाब के बच्चों का भविष्य संवारना है, लेकिन इसके बजाय उन्हें सड़कों पर उतरकर उस सरकार के लिए आंकड़े इकट्ठा करने को मजबूर किया जा रहा है जिसने जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक समुदाय दोनों का अपमान बताया।
रणधावा ने इस तथाकथित “नशीली दवाओं की जनगणना” से प्राप्त होने वाले आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रकार सरकार ने पहले भी झूठे दावों और प्रचार-प्रसार वाले सर्वेक्षणों के माध्यम से अपनी छवि सुधारने का प्रयास किया है, उसी प्रकार इस अभियान से प्राप्त आंकड़ों का भी राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी हकीकतों से मुंह मोड़ रही है और मनगढ़ंत आंकड़ों के पीछे अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब की जनता को अब वास्तविकता और जनसंपर्क से प्रेरित राजनीति के बीच का अंतर समझना होगा।

