N1Live National रंगभरी एकादशी : मथुरा से शिवनगरी काशी आएगी रसियारों की टोली, खूब खेलेंगे रंग-फूलों की होली
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रंगभरी एकादशी : मथुरा से शिवनगरी काशी आएगी रसियारों की टोली, खूब खेलेंगे रंग-फूलों की होली

Rangbhari Ekadashi: A group of Rasiyars will come from Mathura to Shivanagari Kashi, and will play Holi with colours and flowers.

27 फरवरी । रंगभरी एकादशी के दिन शिवनगरी काशी अलग ही रंग-बिरंगे उल्लास से भर जाती है। यह त्योहार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जो होली (फगुआ) से ठीक चार दिन पहले पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को उनके मायके से काशी लेकर आते हैं।

इसी उल्लास में पूरा शहर भक्ति, रंग और फूलों के रंग में रंग जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंगभरी एकादशी को भगवान शिव माता गौरा के साथ गौना बारात लेकर काशी पहुंचते हैं। यह परंपरा बहुत पुरानी है। इसी वजह से इस दिन काशीवासी बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का विशेष स्वागत करते हैं। शहर के कोने-कोने में ‘नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ का जयकारा गूंजता है। जहां दुनिया भर में होली से पहले सिर्फ तैयारी होती है, वहीं काशी में भक्त बाबा और माता से अनुमति लेकर होली खेलना शुरू कर देते हैं। लोग गुलाल, अबीर और फूलों की वर्षा से उनका स्वागत करते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है, दीप जलाए जाते हैं और हर तरफ खुशी का माहौल रहता है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भव्य डोला निकाला जाता है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का डोला गलियों से गुजरता है और पूरा इलाका रंगों में सराबोर हो जाता है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि मंदिर में बेरिकेडिंग की जाएगी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। स्पर्श दर्शन की व्यवस्था नहीं होगी। इस बार खास बात यह है कि मथुरा-ब्रज की रास परंपरा काशी में भी देखने को मिलेगी। ब्रज के रसिया और रंग खेलने वाले काशी पहुंचेंगे और यहां भी रास रचाया जाएगा।

काशी के निवासी प्रभुनाथ त्रिपाठी बताते हैं कि काशीवासी देवी-देवताओं के साथ मिलकर बाबा और माता के आने की खुशी मनाते हैं। पुराने समय से चली आ रही इस परंपरा में भक्त रंग चढ़ाकर होली खेलने की अनुमति मांगते हैं। इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को उनके ससुराल का भ्रमण भी कराते हैं।

धार्मिक महत्व की बात करें तो रंगभरी एकादशी पर शिव-पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और जीवन की कई मुश्किलें दूर हो जाती हैं। काशी के हर मंदिर को सजाया जाता है।

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