N1Live Entertainment यादों में अमला : अमला शंकर ऐसे बनीं आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा
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यादों में अमला : अमला शंकर ऐसे बनीं आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा

Remembering Amala: How Amala Shankar Became a Pioneer of Modern Indian Dance

वर्ष 2012 में जब फ्रांस के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में रेड कार्पेट बिछाया गया, तो दुनिया भर के मीडिया की निगाहें एक 93 वर्षीय भारतीय महिला पर टिकी हुईं थी। यह अवसर था 1948 की ऐतिहासिक फिल्म ‘कल्पना’ के डिजिटल रूप से सहेजे गए संस्करण की विशेष स्क्रीनिंग का। अपनी मुस्कान और अद्भुत आत्मविश्वास के साथ, इस वयोवृद्ध नृत्यांगना ने पत्रकारों से मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं इस साल कान्स में आई सबसे युवा फिल्म स्टार हूं”। यह महिला कोई और नहीं बल्कि आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा और मशहूर कोरियोग्राफर अमला शंकर थीं।

अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले (वर्तमान बांग्लादेश) के बाटाजोर गांव में एक स्वर्ण व्यापारी परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अमला नंदी था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी, शिक्षा और कला के प्रबल समर्थक थे तथा प्रकृति एवं ग्रामीण जीवन से गहरा लगाव रखते थे।

1931 में 11 वर्षीय अमला अपने पिता के साथ पेरिस के ‘अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी’ में गईं। उस समय फ्रॉक पहने हुए इस छोटी बच्ची की मुलाकात दिग्गज भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की मां हेमांगिनी देवी ने अमला को स्नेहपूर्वक पहनने के लिए एक साड़ी दी। यहीं से उनका कलात्मक सफर शुरू हुआ और वह उदय शंकर के नृत्य दल का हिस्सा बन गईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जो अमला की नृत्य में रुचि से वाकिफ थे, ने उनके पिता को उन्हें अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए राजी किया और बाद में उन्हें यूरोप में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में ‘कालिया दमन’ नामक प्रस्तुति के साथ उन्होंने मंच पर अपना पहला कदम रखा।

नृत्य की वैश्विक यात्राओं के दौरान उदय शंकर और अमला के बीच का संबंध प्रगाढ़ होता गया। 1939 में जब यह नृत्य दल चेन्नई में ठहरा हुआ था, तब उदय शंकर ने अमला के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। 1942 में दोनों ने शादी कर ली। इस दंपति ने दिसंबर 1942 में एक पुत्र (प्रसिद्ध संगीतकार आनंद शंकर) और जनवरी 1954 में एक पुत्री (प्रख्यात नृत्यांगना एवं अभिनेत्री ममता शंकर) को जन्म दिया।

मंच के अलावा 1948 में उन्होंने उदय शंकर की फिल्म ‘कल्पना’ में मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म एक युवा नर्तक के अकादमी स्थापित करने के सपने पर आधारित थी। एक अद्भुत नृत्यांगना होने के साथ-साथ अमला शंकर एक बहुमुखी चित्रकार भी थीं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि वे अपनी चित्रकारी में कभी तूलिका का उपयोग नहीं करती थीं। वे केवल अपनी उंगलियों, नाखूनों और टूथपिक के सहारे कैनवस पर रंग उकेरती थीं। उन्होंने लेखन में भी अपना योगदान दिया और उनके द्वारा लिखी गई एक पुस्तक की प्रस्तावना स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।

अमला शंकर का जीवन केवल कला तक सीमित नहीं था। अल्मोड़ा केंद्र के बंद होने के बाद उन्होंने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (यूएसआईसीसी) की स्थापना की, जहां उन्होंने पांच वर्ष की उम्र से ही बच्चों को भारतीय कला के संस्कार दिए। वे ‘स्त्री शक्ति – द पैरेलल फोर्स’ जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं और सत्य साईं बाबा की परम भक्त के रूप में उनका आध्यात्मिक जीवन भी काफी समृद्ध था।

उन्होंने 92 वर्ष की आयु में ‘सीता स्वयंवर’ नामक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों को चकित कर दिया था। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में सोते हुए हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया था।

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