मेट्रोमैन के नाम से चर्चित ई. श्रीधरन ने शुक्रवार को केरल सरकार के नए घोषित तिरुवनंतपुरम-कासरगोड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) प्रोजेक्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे अव्यवहारिक, तकनीकी रूप से खराब और जनता के पैसे की बर्बादी बताया। यह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की एक दिन पहले की टिप्पणियों का जवाब था।
श्रीधरन ने कहा कि आरआरटीएस प्रोजेक्ट का केरल के लिए कोई वास्तविक फायदा नहीं है और यह सेमी-हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट से भी कमतर है। उन्होंने कहा, “किसी ने सरकार को गुमराह किया है। यह जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। सिर्फ घोषणाओं से प्रोजेक्ट सफल नहीं होंगे।”
श्रीधरन ने तर्क दिया कि आरआरटीएस को असल में सिर्फ तिरुवनंतपुरम-चेंगन्नूर स्ट्रेच पर ही लागू किया जा सकता है। इसे उससे आगे बढ़ाने के लिए ट्रेनों की गति कम करनी पड़ेगी, जिससे सिस्टम का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
उन्होंने पूछा, “अगर स्पीड कम करनी है तो ऐसे प्रोजेक्ट का क्या फायदा?” श्रीधरन ने पहले छोड़े गए हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया और बताया कि उन्होंने पहले व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री के साथ इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की थी। मुख्यमंत्री ने संतोष जताया था और अधिकारियों को भी नियुक्त किया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार केंद्र से औपचारिक रूप से संपर्क करने में हिचकिचाई। उन्होंने पूछा, “लेफ्ट सरकार ने खुद ही पहल की थी। अब यह अचानक बदलाव क्यों हो रहा है?”
श्रीधरन ने यह भी बताया कि सर्वे के लिए राज्य की मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण के लिए सरकारी मदद बहुत जरूरी थी। इसके बिना कोई भी रेल प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हाई-स्पीड रेल से आरआरटीएस में बदलाव तकनीकी असफलता और नीति सोच में स्पष्ट न होने को दिखाता है।
उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लोक केरल सभा में दिए गए बयान के एक दिन बाद आई थी। उस बयान में विजयन ने कहा था कि रेलवे मंत्रालय ने केरल के प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी देने से मना कर दिया, जिसके कारण राज्य को आरआरटीएस जैसे दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
विजयन ने श्रीधरन पर भी निशाना साधा और देरी को “केंद्र के पावर सेंटर्स” से उनकी नजदीकी से जोड़ा। उन्होंने श्रीधरन के भाजपा से जुड़े होने और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी की बात भी याद दिलाई।
23 जनवरी को श्रीधरन ने कहा था कि केंद्र ने केरल के लिए वैकल्पिक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक 430 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा बनाया जाएगा, जिसमें श्रीधरन मुख्य सलाहकार होंगे।
इस लाइन में दूरी लगभग तीन घंटे 15 मिनट में तय होगी और इसमें 22 स्टेशन होंगे। यह तीनों बड़े एयरपोर्ट को जोड़ेगी। ऊंचे हिस्सों और सुरंगों के जरिए जमीन अधिग्रहण कम करने के लिए डिजाइन किए गए इस प्रोजेक्ट की डीपीआर नौ महीनों के अंदर आने की उम्मीद है।


Leave feedback about this