धोखाधड़ी के आरोपी से आध्यात्मिक उपदेशक बने राधे श्याम को आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुदीप कौर भट्टी द्वारा अंतरिम जमानत बढ़ाने की उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद जेल वापस भेज दिया गया।
अधिवक्ता देवेंद्र वर्मा ने बताया कि फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी श्याम ने मार्च के मध्य में अपनी पत्नी की बीमारी के आधार पर अंतरिम जमानत प्राप्त की थी। हालांकि, उन्होंने इसी आधार पर अदालत से अपनी अंतरिम जमानत बढ़ाने की अपील की थी। पिछली सुनवाईयों में अदालतों ने उनकी अंतरिम जमानत को संक्षिप्त रूप से बढ़ाया था, लेकिन अंततः उनकी याचिका खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्होंने कानून के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और आज जेल लौट गए।
श्याम को फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 54 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी ने कुछ साल पहले निवेशकों को बेहतर रिटर्न का वादा करते हुए फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी बनाई और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) शुरू की। तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस ने 2018 में उसे गिरफ्तार कर उसके इस धोखाधड़ी के कारोबार का भंडाफोड़ किया और लगभग 3,000 करोड़ रुपये के उसके कारोबार का आकलन किया। उसके काम करने के तरीके से पता चला कि उसकी कंपनी देशभर में सदस्यों को भर्ती कर रही थी और सदस्यता शुल्क के रूप में प्रति व्यक्ति 3,750 रुपये ले रही थी।
हिसार जिले के शिसवाला गांव का निवासी, वह हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुका है। इस व्यापक सदस्यता अभियान के माध्यम से कंपनी ने करोड़ों रुपये एकत्र किए। उसने 2015 से 2018 तक लगभग तीन वर्षों में एक बड़े पैमाने पर मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटाले के जरिए देश भर में 32 लाख से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं का डेटा जुटाकर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा की।
हालांकि उन्हें 2023 में साइबरबाद से धोखाधड़ी मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन आयकर विभाग ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी। जांच एजेंसियों ने उन पर विभाग के साथ 54 करोड़ रुपये के जीएसटी की चोरी का मामला दर्ज किया और उनके साथ एमडी बंसी लाल सिहाग पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक (संशोधन) अधिनियम की धारा 9 और 9एए, वित्त आयोग (विविध प्रावधान) अधिनियम की धारा 83, 89 और 89(1)(ए) तथा केंद्रीय बिक्री कर (संशोधन) अधिनियम की धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया गया।
श्याम और सिहाग दोनों ने 10 नवंबर, 2025 को हिसार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद श्याम को अंतरिम जमानत मिल गई जबकि सिहाग अभी भी जेल में है। गौरतलब है कि साइबराबाद से जमानत मिलने के बाद श्याम ने अपने नाम के आगे ‘परमगुरु’ लगा लिया और खुद को एक उपदेशक घोषित कर दिया। उसने 2025 में डबवाली के पास एक आश्रम बनवाया और जरूरतमंद लोगों के लिए कई सेवाएं शुरू करने का दावा किया।

