N1Live National मनोज कुमार के निधन से दुखी, उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
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मनोज कुमार के निधन से दुखी, उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

Saddened by the death of Manoj Kumar, he left an indelible mark on Indian cinema: President Draupadi Murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर अभिनेता मनोज कुमार के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा वो हमारी स्मृति में अंकित रहेंगे।

एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा, “अभिनेता और फिल्मकार मनोज कुमार के निधन से दुखी हूं। उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी है। अपने लंबे और प्रतिष्ठित करियर के दौरान वे अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जाते थे, जो भारत के योगदान और मूल्यों पर गर्व की भावना को बढ़ावा देती थीं।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि अभिनेता ने राष्ट्रीय नायकों, किसानों और सैनिकों के जिन प्रतिष्ठित चरित्रों को जीवंत किया, वे हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित रहेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका सिनेमा हमेशा राष्ट्रीय गौरव को जगाएगा और हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं।

राष्ट्रपति से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिवंगत एक्टर के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने भी एक्स पोस्ट में लिखा, “महान अभिनेता और फिल्मकार मनोज कुमार के निधन से बहुत दुख हुआ। वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें खास तौर पर उनकी देशभक्ति और उनके जोश के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कामों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और वे पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।”

बता दें कि देशभक्ति फिल्मों के माध्यम से दर्शकों के दिलों में अलग जगह बनाने वाले हिंदी सिने जगत के दिग्गज कलाकार मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

मनोज कुमार ने बॉलीवुड को ‘उपकार’, ‘पूरब-पश्चिम’, ‘क्रांति’, ‘रोटी-कपड़ा और मकान’ सहित ढेर सारी कामयाब फिल्में दीं। इन फिल्मों की वजह से उन्हें दर्शक ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जानते थे। अभिनेता मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बना। बंटवारे के बाद मनोज कुमार के अभिभावकों ने भारत में रहने का फैसला किया। इसी के साथ वे दिल्ली आ गए। मनोज कुमार ने बंटवारे का दर्द बहुत नजदीक से देखा था।

मनोज कुमार को उनकी फिल्मों के लिए 7 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे। साल 1968 में ‘उपकार’ ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलॉग के लिए चार फिल्मफेयर जीते। 1992 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2016 में उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया।

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