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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आधुनिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के लिए आईआईटी-गांधीनगर में शीघ्र ही शुरू होगा ‘समर्थ’

'Samarth' to launch soon at IIT-Gandhinagar for advanced research and training in the semiconductor sector.

भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए बहुत तेजी से कार्य हो रहा है। गुजरात को सेमीकंडक्टर क्षेत्र का हब बनाने के लिए औद्योगिक निवेश के साथ इस क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स तथा इंजीनियरिंग प्रोफेसर्स को आधुनिक प्रशिक्षण एवं अनुभव प्राप्त हो; इस दिशा में भी कार्य करना महत्वपूर्ण है।

इस उद्देश्य को साकार करने के लिए शीघ्र ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-गांधीनगर में सिलिकॉन एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब (समर्थ) शुरू होगा। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र की स्थापना होने जा रही है। इसके लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा आईआईटी-गांधीनगर द्वारा कुल 190 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।

आईआईटी-गांधीनगर द्वारा इस केन्द्र के संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की खरीदारी तथा निर्माण कार्य के लिए कंसल्टेंट्स की नियुक्ति करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। शीघ्र ही यह केन्द्र प्रारंभ होगा और विद्यार्थी यहां आधुनिक तथा उद्योगों की मांग के अनुसार सेमीकंडक्टर क्षेत्र का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।

नवाचार, उद्योगों के साथ भागीदारी तथा व्यापक वर्कफोर्स के निर्माण द्वारा भारत में विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के निर्माण के लिए ‘समर्थ’ की स्थापना होने जा रही है। ‘समर्थ’ मुख्यतः सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण प्रदान करने पर केन्द्रित रहेगा। यहां इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थी, प्रोफेसर्स और सेमीकंडक्टर उद्योगों में काम करने वाले विशेषज्ञ अपने कौशल को अपग्रेड करने के लिए आ सकेंगे। इस केन्द्र में इंजीनियरिंग विद्यार्थी फैब-रेडी बनेंगे अर्थात वे सेमीकंडक्टर प्लांट में कार्य करने के लिए तैयार होंगे।

विद्यार्थियों में इस क्षेत्र के प्रति शुरू से ही जागरूकता आए; इसके लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। स्थानीय एवं ग्लोबल भागीदारी द्वारा प्रशिक्षण, अनुसंधान और कौशल विकास के लिए ‘समर्थ’ एक समन्वित प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस प्रोजेक्ट को आगे ले जाने के लिए हाल में आईआईटी-गांधीनगर द्वारा गुजरात के अलग-अलग इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ एमओयू करने की तैयारियां चल रही हैं। इस केन्द्र में राज्य के विद्यार्थी मामूली शुल्क पर अध्ययन कर सकें; ऐसी व्यवस्था की गई है। यहां विशेष स्पेशलाइज्ड शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाए जाएंगे तथा समर स्कूल द्वारा विद्यार्थियों को स्कूलों और कॉलेजों में इस क्षेत्र के विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में पहले से ही अवगत कराया जाएगा।

‘समर्थ’ के माध्यम से क्षमता निर्माण के लिए आगामी पांच वर्ष में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी की पढ़ाई कर रहे कुल 5600 विद्यार्थियों को इस केन्द्र के अंतर्गत लाया जाएगा। इसके अतिरिक्त; वॉकेशनल तथा टेक्निकल पाठ्यक्रमों में 1500 टेक्नीशियनों एवं सर्टिफिकेट कोर्स के अंतर्गत 1000 लोगों को प्रशिक्षण देने का आयोजन किया गया है। प्रोफेशनल व अपस्किलिंग में 230 फैकल्टी तथा इंडस्ट्री में कार्यरत 230 प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त; समर स्कूल तथा वन-डे एक्सपोजर प्रोग्राम द्वारा 2700 से अधिक विद्यार्थियों को अवगत करने का आयोजन किया गया है। इस प्रकार; 10 हजार से अधिक वर्कफोर्स को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह केन्द्र आधुनिक सुविधाओं से सज्ज होगा। इसमें नैनो फैब्रिकेशन तथा सीएमओएस प्रक्रिया के प्रशिक्षण के लिए सुविधा का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त; डिवाइस प्रोसेस कैरेक्टराइजेशन सुविधा होगी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा चिप बनाने की प्रक्रिया की जांच, टेस्टिंग और गुणवत्ता को चेक किया जा सकता है। साथ ही; सेमीकंडक्टर प्रोसेस एवं डिवाइस डिजाइन तथा डिवाइस मॉडलिंग लैब और आईसी डिजाइन एवं प्रोटोटाइप लैब का निर्माण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री श्री ने स्पष्ट रूप से कहा है, “हमारा लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम बनाना है। भारत अब सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर से लेकर मशीन निर्माता और लॉजिस्टिक्स तक के सभी स्तर शामिल हैं। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की घोषणा इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे भारत के भीतर ही सामग्री एवं कम्पोनेंट्स की मांग बढ़ेगी, जो स्थानीय उद्योगों के लिए सबसे बड़ा अवसर बनेगी।”

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