पूर्व वित्त मंत्री और आईएनएलडी के राष्ट्रीय संरक्षक संपत सिंह ने भाजपा सरकार पर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया है। आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, “शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना राज्य सरकार का नैतिक दायित्व है, लेकिन इसके विपरीत वह काम कर रही है। अपने करीबी सहयोगियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार इन क्षेत्रों का निजीकरण करने पर तुली हुई है।”
राज्य में नए विश्वविद्यालयों के खुलने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “जब शिक्षा के बजट में ही कटौती कर दी गई है, तो नए विश्वविद्यालय खोलने का क्या उद्देश्य है? सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब हो गई है और सरकार प्राथमिक शिक्षा को खत्म करने पर तुली हुई प्रतीत होती है। स्कूलों में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है, सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है और निजी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है।”
सिंह ने दावा किया कि राज्य भर के सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हजारों शिक्षण पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा, “स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे? सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है ताकि माता-पिता अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हों, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ जाए और गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएं।”
सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और रजिस्ट्रारों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत सिफारिशों और चंदे के आधार पर की गई है, और राज्य के बाहर के लोगों को नियुक्त किया गया है।

