कभी अपने विशाल कोठियों और शांत मोहल्लों के लिए मशहूर गुरुग्राम के पुराने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) सेक्टर अपनी आवासीय रौनक खो रहे हैं। अवैध पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों, गेस्ट हाउसों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की बढ़ती संख्या ने कई वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर किराए पर देने या बेचने और गेटेड सोसाइटियों में जाने के लिए मजबूर कर दिया है।
एचएसवीपी के सर्वेक्षणों और लेखापरीक्षाओं में सेक्टर 15, 17, 21, 22, 23, 31, 38, 40, 46 और 57 को अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों के रूप में पहचाना गया है। इन क्षेत्रों में स्टिल्ट-प्लस-फोर इमारतों और आवासीय संपत्तियों की संख्या अधिक है जिनका उपयोग पीजी, जिम, क्लीनिक और कार्यालयों के लिए किया जा रहा है।
निवासियों का कहना है कि सेक्टर 14, 15 और 17 में चार मंजिला ऊंची इमारतें तेजी से बन रही हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा है या उन्हें अवैध अपार्टमेंट में बदलकर बेचा जा रहा है। सेक्टर 31, 43, 51 और 57 में आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक परिसरों में बदल दिया गया है, जिनमें क्लीनिक, डांस स्टूडियो, होटल और अल्पकालिक किराये की संपत्तियां शामिल हैं।
इसका असर केवल भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन तक ही सीमित नहीं है। निवासी पार्किंग की भीड़भाड़, क्षतिग्रस्त सड़कों, जलभराव, अनियमित कूड़ा संग्रहण और बंदरों व आवारा कुत्तों के आतंक की शिकायत कर रहे हैं। आंतरिक सड़कों पर यातायात जाम और पार्कों पर कथित अतिक्रमण के कारण वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि टहलने जाना भी मुश्किल हो गया है।
सेक्टर 17 रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश जिंसी ने कहा कि यह इलाका कभी सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों और पूर्व नौकरशाहों का घर हुआ करता था। उन्होंने कहा, “घरों को राजनीतिक कार्यालयों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, और पार्कों पर राजनीतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के लिए अतिक्रमण किया जा रहा है। चार मंजिला ऊंची इमारतें अवैध पीजी और पार्किंग समस्याओं के कारण परेशानी का सबब बन गई हैं। नागरिक सुविधाएं दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही हैं।”
यूनाइटेड गुरुग्राम आरडब्ल्यूए के प्रवीण यादव ने पलायन के लिए कमजोर प्रवर्तन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “कोठियों को गिराया जा रहा है या उन्हें अवैध पीजी में बदला जा रहा है। लोग अब गेटेड सोसाइटियों में रहना चाहते हैं, जहां कम से कम कुछ जवाबदेही हो और आरडब्ल्यूए का स्वाभाविक सहयोग तंत्र मौजूद हो।”
गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) ने शहर भर में 1,625 अवैध और अनधिकृत पीजी (पेइंग रूम) की पहचान की है। इनमें से 276 एचएसवीपी सेक्टरों में, 492 लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में, 856 एमसीजी क्षेत्रों में और एक एचएसआईआईडीसी क्षेत्र में स्थित है। नगर निगम ने एचएसवीपी, नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग और एचएसआईआईडीसी से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
एमसीजी आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि अनधिकृत पीजी (पेइंग रूम) से जनसंख्या घनत्व बढ़ता है और नागरिक बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि निगम नागरिक सेवाओं का रखरखाव कर रहा है, लेकिन मूल समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की आवश्यकता है।
इस बीच, एचएसवीपी ने व्यावसायिक उपयोग में लाई जा रही आवासीय संपत्तियों का विशेष सर्वेक्षण शुरू किया है। अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर 1 से 57 तक के लगभग 500 संपत्ति मालिकों को नोटिस प्राप्त हुए हैं। सेक्टर 1 से 23 तक के क्षेत्र को कवर करने वाले एस्टेट ऑफिस 1 ने एचयूडीए अधिनियम, 1977 की धारा 17(3) के तहत लगभग 100 नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से 34 मामले धारा 17(4) के अंतर्गत स्थानांतरित किए गए हैं। एचएसवीपी ने आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग के प्रति शून्य सहिष्णुता का संकल्प लिया है।

