शिलाई ‘खत’ के तहत आने वाले 52 गांवों के प्रतिनिधियों ने शादियों में फिजूलखर्ची रोकने, परिवारों पर पैसे का बोझ कम करने और पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखने के लिए एकमत से 17 प्रस्ताव पास किए हैं। ये फैसले बुधवार को शिलाई गांव में माता थारी के आम आंगन में हुई एक मीटिंग में लिए गए, जिसकी अध्यक्षता 52 गांवों के ‘जेलदार’ दिनेश तोमर ने की। ‘नंबरदार’, ‘धीमादार’ और समुदाय के दूसरे जाने-माने सदस्यों ने बातचीत में हिस्सा लिया और सभी 17 प्रस्ताव एकमत से पास कर लिए गए। मीटिंग में दहेज पर पूरी तरह बैन लगाने का फैसला किया गया, और सिर्फ पारंपरिक चढ़ावे, जिसे ‘सोबो-पैतो’ कहा जाता है, की इजाज़त दी जाएगी। बारात में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 100 तक सीमित होगी, जबकि लकड़ी काटने की रस्म में सिर्फ 20 से 25 लोगों को ही शामिल होने की इजाज़त होगी।
पारंपरिक रीति-रिवाज माश खाना, जिसके तहत दूल्हा और दुल्हन के परिवार खाना होस्ट करते हैं, वह भी बंद कर दिया जाएगा। शादी के जुलूस के दौरान शराब और दूसरी नशीली चीज़ों का इस्तेमाल मना होगा। प्रस्तावों में दुल्हन की ज्वेलरी को पांच कैटेगरी तक सीमित करने, कपड़ों और जूतों के तोहफों को रेगुलेट करने और शादियों में डांस करने के लिए लोगों को पैसे देने की प्रथा को खत्म करने की भी बात कही गई है।
टेंट और DJ के इंतज़ाम पर होने वाले खर्च पर भी रोक रहेगी, शादी के जश्न के दौरान DJ की इजाज़त सिर्फ़ दो दिन होगी।
पारंपरिक नेवड़ा समारोह जारी रहेगा, जिसमें पारंपरिक योगदान 10 रुपये तय किया गया है, जबकि मामा का धांग के लिए राशि 501 रुपये तय की गई है। ये नियम शिलाई इलाके के अंदर और बाहर होने वाली शादियों पर लागू होंगे। इलाके के लिए त्योहारों की तारीखें भी शिलाई में ही तय की जाएंगी और पूरे ‘खत’ में एक जैसा मनाया जाएगा। प्रस्तावों का उल्लंघन करने पर 52,000 रुपये का जुर्माना और पूरे ‘खत’ के लिए सामुदायिक दावत का प्रावधान किया गया है।
तोमर ने कहा कि इस पहल का मकसद गैर-ज़रूरी खर्च को रोकना और परिवारों पर सामाजिक दबाव कम करना है।
उन्होंने कहा, “ये फ़ैसले सभी 52 गांवों के प्रतिनिधियों की सहमति से एकमत से लिए गए हैं। हमारा मकसद सादी शादियों को बढ़ावा देना, परिवारों पर पैसे का बोझ कम करना और हमारे पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखना है।” इस पहल का मकसद शादियों को और सस्ता बनाना है, खासकर आर्थिक रूप से कमज़ोर और मिडिल-इनकम वाले परिवारों के लिए, और साथ ही सादगी को बढ़ावा देना है।

