शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आज कहा कि आपदा के समय लोगों की जान बचाने में आपदा मित्रों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने यहां आपदा मित्रों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की और सभी को आपदा किट वितरित कीं। उन्होंने कहा, “हमें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए समाज कल्याण के लिए काम करना चाहिए। आपदा मित्र जिला प्रशासन का अभिन्न अंग हैं। युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि आपदा के समय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और बचाव कार्य में तेजी लाई जा सके।”
कश्यप ने कहा कि आपदा मित्रों को सामाजिक सेवा में निपुण होने के साथ-साथ अपनी सोच और दृढ़ संकल्प को भी विकसित करना होगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्र सरकार के सहयोग से आपदा के “गोल्डन आवर” के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह पहल चला रहा है। प्रशिक्षित आपदा मित्र स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर त्वरित और प्रभावी राहत कार्यों को सुनिश्चित करते हैं।
आपदा मित्र योजना का उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को प्रशिक्षित करना और उन्हें आपदाओं के दौरान “प्रथम प्रतिक्रिया दल” के रूप में तैयार करना है। यह योजना भूस्खलन, भारी वर्षा, हिमपात और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। युवाओं और स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव, प्राथमिक चिकित्सा, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित निकासी जैसी आवश्यक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
कश्यप ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य आपदाओं के प्रति सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना, जान-माल के नुकसान को कम करना और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देना था। उन्होंने आगे कहा कि कुल मिलाकर, यह शिमला को एक सुरक्षित, अधिक तैयार और लचीला शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
बैठक में आपदा मित्र भारती, कुलदीप शर्मा, ज्योन मिश्रा, नितीश, सार्थक चौहान, विशाल ठाकुर, मयंक भारद्वाज, साहिल ठाकुर, अपराजिता, नीलाक्षी, मीनाक्षी, अपराजिता, मीनाक्षी, खुशबू, ज्योति, लक्ष्मी शामिल हुए।

