N1Live Entertainment मुंबई के नाम एक ‘लव लेटर’ थी ‘शोर इन द सिटी’, राज और डीके ने साझा कीं अनकही यादें
Entertainment

मुंबई के नाम एक ‘लव लेटर’ थी ‘शोर इन द सिटी’, राज और डीके ने साझा कीं अनकही यादें

'Shor in the City' was a 'love letter' to Mumbai; Raj and DK share untold memories

30 अप्रैल । डार्क कॉमेडी-क्राइम फिल्म ‘शोर इन द सिटी’ ने अपनी रिलीज के 15 साल पूरे कर लिए हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन राज निदिमोरू, कृष्णा डी.के. और सीता मेनन ने किया है।

इस खास मौके पर राज निदिमोरू और कृष्णा डी.के. ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए फिल्म के शुरुआती दिनों की कुछ अनकही यादें शेयर कीं। किए गए पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे बिना संसाधनों और अनुमति के शुरू हुआ यह सफर उनकी पहचान बन गया। उन्होंने लिखा, “जब हम भारत वापस आए, तो मुंबई शहर ने हमें गहराई से प्रभावित किया। शहर की अफरा-तफरी, अखबारों की कतरनें और यहां का अनूठा जीवन देखकर हमारे मन में इस शहर के प्रति एक ‘लव लेटर’ लिखने का ख्याल आया। हमारे इस विचार ने ही फिल्म ‘शोर इन द सिटी’ को जन्म दिया।”

उन्होंने आगे लिखा, “हमने इसे साल के सबसे व्यस्त समय, गणेश चतुर्थी के दौरान शूट किया था। उस समय हमने शुरुआती डिजिटल कैमरों से फिल्म की शूटिंग की, जिसमें तेज रोशनी और ओवरएक्सपोजर जैसी कई दिक्कतें थीं। शुरुआत में हमने खुद ही इसे बनाना शुरू किया बिना अनुमति, बिना सही उपकरण, यहां तक कि बिना ट्राइपॉड के। अपने ही पैसों से काम शुरू किया, बाद में कुछ प्रोड्यूसर्स जुड़े और फिल्म पूरी हो पाई।”

उन्होंने फिल्म के बारे में जानकारी देते हुए लिखा, “यह फिल्म असली और पूरी तरह से स्वतंत्र सोच के साथ बनाई गई थी। हमने वही किया जो हमें सही लगा। इसे रिलीज करना भी अपने आप में एक अलग अनुभव था। आज पीछे मुड़कर देखते हैं, तो लगता है कि शोर हमारे लिए एक नई शुरुआत थी। अपनी पहचान और अपनी आवाज खोजने की और वह पहली छोटी सी कमाई कौन भूल सकता है, जो हमें लिखने, डायरेक्ट करने और प्रोड्यूस करने के लिए मिली थी। वह इतनी थी कि हम एक सेकंड हैंड कार खरीद सकें… और आखिरकार सीता को उसकी कार वापस कर सकें।”

उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए लिखा, “आज भी हमें शूटिंग का हर दिन वह पागलपन, जुगाड़ और हर मुश्किल के बीच काम पूरा करने की खुशी अच्छे से याद है। हम इस शोर, शहर और उस शुरुआत के लिए आभारी हैं, जहां से सब कुछ शुरू हुआ। यह शोर आज भी थमता नहीं है।”

Exit mobile version