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अलग-अलग शैलियों के गीत गाकर महसूस हुई भारतीय संगीत की असली ताकत : श्रेया घोषाल

Shreya Ghoshal: Singing songs of different genres has made me realise the true power of Indian music

12 फरवरी )। भारतीय संगीत की दुनिया में श्रेया घोषाल का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से श्रेया हिंदी सिनेमा के संगीत को अपनी आवाज से नए मुकाम पर पहुंचाती आई हैं।

उन्होंने कई भाषाओं में अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा है। हाल के दिनों में उनके कई नए गाने रिलीज हुए हैं, जिनमें ‘इंकलाबी जिद्दी’, ‘मातृभूमि’, ‘असलू सिनेमा’, ‘गाना गुंजूर’, ‘ओ माई री’, और ‘थलोड़ी मरायुवथेविदे नी’ जैसे गीत शामिल हैं।

इनमें से किसी गाने में देशभक्ति और क्रांति का स्वर है, तो किसी में रिश्तों की कोमल भावनाएं और लोक संगीत की खुशबू है, तो वहीं किसी में आधुनिक सिनेमा की एनर्जी है।

इन गानों को लेकर श्रेया घोषाल ने कहा, ”एक के बाद एक इतने अलग-अलग तरह के गाने गाना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा है। अलग-अलग भावनाओं और संगीत शैलियों के बीच लगातार काम करना यह एहसास कराता है कि भारतीय संगीत वास्तव में कितना विशाल और बहुआयामी है। हर गीत अपनी एक अलग संस्कृति और कहानी से जुड़ा होता है, लेकिन इन सबकी जड़ में भावना और कहानी ही होती है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है।”

श्रेया ने कहा, ”एक गायक के तौर पर इतनी विविध कहानियों को आवाज देना बेहद संतोषजनक है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे ऐसे संगीत सफर का हिस्सा बनने का मौका मिला, जो भारतीय संगीत की एकता और समृद्धि को दर्शाता है। संगीत भाषा या क्षेत्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि भावनाओं की सच्चाई ही उसे श्रोताओं से जोड़ती है।”

श्रेया घोषाल को ‘डायनामिक्स की रानी’ कहा जाता है। ‘बैरी पिया’ और ‘डोला रे डोला’ जैसे गीतों ने उन्हें पहले ही कदम पर राष्ट्रीय पहचान दिला दी। इसके बाद, उन्होंने ‘धीरे जलना’, ‘ये इश्क हाय’, ‘फेरारी मोन’, ‘जीव रंगला’, और ‘मायावा थूयावा’ जैसे गीतों के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किए, जिनमें पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, और तेलंगाना के राज्य पुरस्कारों के साथ-साथ बीएफजेए अवॉर्ड भी शामिल हैं।

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