8 मार्च । पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य में कराई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के जरिए मतदाता सूची में बदलाव का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाना है।
ममता बनर्जी ने धरना स्थल से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चुनौती देते हुए कहा कि अगर भाजपा को चुनाव आयोग का समर्थन भी मिल जाए, तो भी वह चुनाव नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा, “बंगाल की जनता अपने अधिकार छीनने वालों को करारा जवाब देगी।”
पश्चिम बंगाल की सीएम ने सवाल उठाया कि जो लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाल चुके हैं, उनके नाम अब मतदाता सूची से कैसे हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर किसी को 2024 में वोटरों ने चुनकर प्रधानमंत्री बनाया, तो उन्हीं वोटरों में से कुछ को अब अचानक अयोग्य कैसे घोषित किया जा सकता है? उन्होंने पहले मतदान किया था और अब उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस मामले की जांच करनी चाहिए। उन्होंने सीवी आनंद बोस के 5 मार्च को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में अभी तीन साल बाकी थे, इसलिए उनके इस्तीफे की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल जुलाई में उनके इस्तीफे की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि वे पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल बदलने के मुद्दे पर राज्य सरकार ने सभी प्रोटोकॉल का पालन किया था और भाजपा इस मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दे रही है।
उन्होंने कहा कि अगर कार्यक्रम में किसी तरह की अव्यवस्था हुई है तो इसकी जिम्मेदारी निजी आयोजकों और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की है, जिसने कार्यक्रम के लिए स्थल उपलब्ध कराया था, न कि राज्य सरकार की।


Leave feedback about this