June 9, 2026
National

‘अनर्गल बयानबाजी बंद करो, वरना जवाब दूंगा’: सुभाष यादव ने साधु यादव को दी चेतावनी

‘Stop making baseless statements, or I will respond’: Subhash Yadav warns Sadhu Yadav

बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल के परिवार से जुड़ा विवाद एक बार फिर सामने आया है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई और पूर्व सांसद सुभाष यादव ने अपने भाई साधु यादव द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें सार्वजनिक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी बंद नहीं हुई तो वह भी खुलकर जवाब देने को मजबूर होंगे।

सुभाष यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि साधु यादव को बचपन से ही मुझसे जलन रही है। जब मैं दो साल का था, तब भी उन्होंने मेरे साथ मारपीट की थी। आज भी वे लगातार मेरे खिलाफ अनाप-शनाप बयान देते रहते हैं। अब उन्हें चेत जाना चाहिए, नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि साधु यादव बार-बार उनका नाम विभिन्न लोगों के साथ जोड़कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं।

सुभाष यादव ने कहा कि वे कभी शहाबुद्दीन का नाम लेते हैं, कभी सतीश पांडे का, कभी किसी और का। यह गलत है। उन्हें अपने नाम के अनुरूप साधु की तरह व्यवहार करना चाहिए और दूसरों के नाम उछालना बंद करना चाहिए। दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का जिक्र करते हुए सुभाष यादव ने कहा कि उनके बारे में गलत बातें करना उचित नहीं है। शहाबुद्दीन अब हमारे बीच नहीं हैं। मैं उन्हें नमन करता हूं। वे बहुत सज्जन और अच्छे व्यक्ति थे। उनके नाम का इस्तेमाल कर किसी पर आरोप लगाना ठीक नहीं है।

सतीश पांडे को लेकर दिए गए बयानों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम लिया जा रहा है, वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य कर रहे हैं और गरीबों के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में अनावश्यक रूप से किसी का नाम विवाद में घसीटना गलत है। सुभाष यादव ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी साधु यादव के बयानों का जवाब नहीं दिया, लेकिन अब लगातार हो रही टिप्पणी के कारण उन्हें अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखनी पड़ रही है। मैं मीडिया के माध्यम से कहना चाहता हूं कि मेरे बारे में कोई भी बेबुनियाद टिप्पणी न करें। राजनीति में लाखों लोग हैं, सिर्फ मैं ही नहीं हूं। हर किसी का अपना रास्ता है।

राजद द्वारा विधान परिषद चुनाव में सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी सुभाष यादव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला तेजस्वी यादव का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं और परिवार के कई लोग इससे खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय है कि जिस तरह राजद सीमित सीटों पर सिमटती जा रही है और चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे समय में किसी साधारण कार्यकर्ता को मौका दिया जाता तो तेजस्वी यादव की छवि मजबूत होती। लेकिन जिस व्यक्ति को टिकट दिया गया है, वह परिवार और संगठन में विवाद पैदा करने वाला माना जाता है।

सुभाष यादव ने दावा किया कि इस फैसले से राजद के कई कार्यकर्ता असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्य ही नहीं, परिवार के कई लोग इस फैसले से नाराज हैं। हालांकि अंतिम निर्णय तेजस्वी यादव का है और पार्टी उनकी है, इसलिए उन्होंने जिसे उचित समझा, उसे उम्मीदवार बनाया।

लालू प्रसाद यादव के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए सुभाष यादव ने कहा कि वे शुरुआती दौर से ही उनके साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1986 से ही हम लालू यादव के साथ रहे हैं। उस समय जब कोई व्यवस्था नहीं होती थी, तब हम उनके लिए खाना बनाते थे, लिट्टी-चोखा तैयार करते थे और हर तरह से सहयोग करते थे। राजनीति में आने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन लालू यादव के कहने पर ही मैं सार्वजनिक जीवन में आया।

उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर सरकारों को सहयोग दिया है और उस दौर की परिस्थितियां आज से भिन्न थीं। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति में सभी दलों और नेताओं का सहयोग आवश्यक होता था।

सुभाष यादव ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं है, लेकिन यदि उनके खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाए जाते रहे तो वे भी तथ्यों के साथ जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि मेरे नाम का इस्तेमाल कर बेवजह बयानबाजी न की जाए। अगर ऐसा जारी रहा तो मैं भी खुलकर अपनी बात रखूंगा।

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