6 फरवरी । सपनों का पीछा करते हुए एक्टर हर्षवर्धन राणे 16 साल की उम्र में घर से निकल गए थे। एक्टिंग करियर का सपना देखना जितना आसान था उसमें सफलता पाना उतना ही मुश्किल। हालांकि, उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति निश्चय इतना मजबूत रहा है कि कभी भी चुनौतियां उनके सामने बड़ी नहीं लगीं।
दर्शकों को ‘सनम तेरी कसम’, ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी सफल फिल्में देने वाले अभिनेता हर्षवर्धन राणे 16 साल की उम्र में एक्टिंग के सपने लेकर घर से निकल पड़े थे। कोई गॉडफादर नहीं था, पूरी तरह आउटसाइडर थे, लेकिन आज वह फिल्म इंडस्ट्री में खास मुकाम पर हैं। बॉलीवुड के साथ ही उन्होंने साउथ की फिल्मों में भी काम किया है।
उन्होंने बताया कि उनका फोकस हमेशा अपने गोल, अपनी इच्छाओं और बेहतर काम करने पर रहा है। वह प्रोड्यूसर को फायदा पहुंचाने और ऑडियंस की उम्मीदें पूरी करने की सोचते हैं। इसी वजह से चुनौतियां उनके रास्ते में कभी हावी नहीं हो पाईं।
हर्षवर्धन ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बताया, “मेरा निश्चय इतना दृढ़ रहा है कि कठिनाइयां कभी मेरे लिए बड़ी हो ही नहीं पाईं। मेरा डिटरमिनेशन फैक्टर मेरे स्ट्रगल से बहुत बड़ा है। कठिनाइयों का साइज मेरे सामने कभी बड़ा नहीं लगा।”
एक्टर ने यह भी बताया कि वह पॉडकास्ट या ऐसे इंटरव्यू में शायद ही बैठते हैं जहां लोग घंटों अपनी मुश्किलों, किसी ने क्या गलत कहा या उनके साथ क्या गलत हुआ, इस पर बात करते हैं। हर्षवर्धन ने कहा, “मेरे पास वो मटेरियल ही नहीं है। मैं डेढ़-दो घंटे तक कठिनाइयों के बारे में बात नहीं कर सकता। मेरे लिए वो कभी मैटर किया ही नहीं। मेरा लक्ष्य और इच्छाएं इतनी बड़ी हैं कि फोकस कभी स्ट्रगल पर नहीं गया।”
उन्होंने कहा, ” मैंने कभी अपने सपनों पर चुनौतियों को हावी नहीं होने दिया। यही वजह है कि मैं बेहतर तरीके से काम कर पाता हूं। मेरा पूरा ध्यान काम की क्वालिटी, प्रोड्यूसर के फायदे और दर्शकों की खुशी पर रहता है।”


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