N1Live National टनल रोड प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की स्थिति का अध्ययन करें : शोभा करंदलाजे
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टनल रोड प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की स्थिति का अध्ययन करें : शोभा करंदलाजे

Study the traffic jam situation in Bengaluru before proceeding with the tunnel road project: Shobha Karandlaje.

केंद्रीय राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार से आग्रह किया कि वह प्रस्तावित टनल रोड प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की समस्या का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन करे। बेंगलुरु में भाजपा के प्रदेश कार्यालय ‘जगन्नाथ भवन’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए करंदलाजे ने टनल रोड प्रोजेक्ट के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया और इसकी अनुमानित लागत में हुई भारी बढ़ोतरी पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि टनल रोड प्रोजेक्ट के पहले पैकेज की अनुमानित लागत 5,484 करोड़ रुपए से बढ़कर 10,734 करोड़ रुपए हो गई है जबकि दूसरे पैकेज की लागत का अनुमान 11,263 करोड़ रुपए लगाया गया है। उन्होंने सवाल किया, “टेंडर की रकम में लगभग 97 प्रतिशत की बढ़ोतरी क्यों हुई है?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रोजेक्ट बिना पर्याप्त तैयारी या उचित वैज्ञानिक अध्ययन के शुरू किया जा रहा है।

सरकार के उस सर्कुलर का जिक्र करते हुए जिसमें कहा गया है कि टेंडर प्रीमियम 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए, उन्होंने सवाल किया कि प्रोजेक्ट की लागत में इतनी भारी बढ़ोतरी की इजाजत कैसे दी गई। उन्होंने कहा, “इस 10,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के लिए बोली (बिडिंग) बुलानी चाहिए थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रोजेक्ट पर एक तकनीकी रिपोर्ट मांगी थी और सरकार ने जरूरी अध्ययन पूरे किए बिना जल्दबाजी में टेंडर मंगाए।

उन्होंने पूछा, “अगर मेट्रो और टनल रोड एक साथ चलेंगी तो सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी? आपने क्या अध्ययन किया है?” करंदलाजे ने सरकार से आग्रह किया कि वह अपने कार्यकाल के बचे हुए समय में ‘बेंगलुरु को बर्बाद न करे।’ उन्होंने यह भी कहा कि वह कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर शहर की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करेंगी।

करंदलाजे ने बेंगलुरु के निवासियों के विरोध और वरिष्ठ नागरिकों के प्रदर्शन के बाद प्रस्तावित पार्क-संबंधी बिल को अस्थायी रूप से वापस लेने के सरकार के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता के विरोध के कारण बिल को अस्थायी रूप से वापस ले लिया है और बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि इसे विधानसभा में दोबारा लाने से पहले जनता की राय ली जाएगी।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने संकेत दिया है कि बिल को बिना एक ‘पूर्ण विराम’ बदले ही वापस लाया जाएगा। उन्होंने झीलों के संरक्षण से जुड़े प्रस्तावित कानून का भी विरोध किया और आरोप लगाया कि रियल एस्टेट के फायदे के लिए बेंगलुरु की झीलों पर पहले ही कब्जा करके उन्हें लेआउट और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बदल दिया गया है।

उन्होंने कहा, “यही वजह है कि बारिश होने पर बेंगलुरु किसी झील जैसा हो जाता है।” करंदलाजे ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक पार्क और झीलें नहीं छीननी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी, “आपके पास बस एक साल बचा है। कर्नाटक को बर्बाद न करें।” उन्होंने सरकार पर आर्थिक हितों से प्रेरित होने का आरोप लगाया और कहा कि पानी, बिजली और कचरा उठाने जैसी जरूरी सेवाओं की लागत हर महीने बढ़ रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद पी.सी. मोहन, बेंगलुरु साउथ के सांसद तेजस्वी सूर्या और बीजेपी बेंगलुरु नॉर्थ जिला अध्यक्ष एस. हरीश मौजूद थे।

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