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‘तकदीर’ ने बदली थी सुभाष घई की ‘तकदीर’, इसी फिल्म से खुले हिंदी सिनेमा के दरवाजे

March 22. Hindi film producer-director Subhash Ghai needs no introduction.

22 मार्च । हिंदी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक सुभाष घई किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।

‘ताल’, ‘खलनायक’, ‘परदेश’, और ‘राम-लखन’ जैसी कई हिट फिल्मों से दर्शकों के दिलों पर छाने वाले सुभाष घई सिनेमा में कई दशकों तक छाए रहे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें खुद नहीं पता था कि हिंदी सिनेमा उनकी जिंदगी बन जाएगी और वह सिनेमा में अलग मुकाम हासिल कर लेंगे? सुनने में यह बात बहुत अजीब लगती है, लेकिन सच है।

निर्माता और निर्देशक बनकर प्रसिद्धि पाने वाले सुभाष घई को नहीं पता था कि उनकी तकदीर क्या खेल खेल रही है। साल 1967 में जिंदगी में आए मोड़ ने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया। निर्देशक ने 1967 में आई फिल्म ‘तकदीर’ में अभिनेता जलाल आगा के साथ फिल्म में एक छोटा सा रोल किया था। रोल भले ही छोटा था, लेकिन किस्मत का ताला खोलने के लिए काफी था, जिसके बाद वे ‘आराधना’ और ‘उमंग’ में भी नजर आए थे, हालांकि किस्मत उन्हें अभिनेता नहीं, निर्देशक बनाने के लिए रास्ता खोल रही थी।

अब सुभाष घई ने अपनी फिल्म से जुड़ी यादों को शेयर किया है और एक पुरानी फोटो भी पोस्ट की है। फोटो में दो यंग लड़के दिख रहे हैं, लेकिन सुभाष दोनों में से कौन हैं, यह पहचान पाना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, “1967 में यह मेरी पहली फिल्म थी, जिसमें मैंने अभिनय किया था। जी हां, यह राजश्री प्रोडक्शन द्वारा निर्मित थी, और पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के दो अभिनेताओं, मुझे और जलाल आगा को फिल्म ‘तकदीर’ में एक छोटी युवा भूमिका के लिए चुना गया था। क्या आप मुझे इस तस्वीर में पहचान सकते हैं?”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे कभी नहीं पता था कि मेरी तकदीर मुझे फिल्म इंडस्ट्री में कहां ले जाएगी। आज मैं खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं और आप सभी का धन्यवाद।”

बता दें कि सुभाष घई का करियर मुख्य अभिनेता के तौर पर नहीं चला, लेकिन उनके द्वारा निर्देशित पहली फिल्म ‘कालीचरण’ ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म साल की सबसे बड़ी एक्शन और थ्रिलर फिल्म बनकर उभरी थी, और इसी फिल्म से अजीत खान को ‘लॉयन’ का टाइटल मिला था।

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