January 14, 2026
Entertainment

सुधा कोंगरा ने यूथ कांग्रेस के आरोप किए खारिज, कहा- फिल्म में नेहरू और इंदिरा गांधी को महान नेता दिखाया गया

Sudha Kongara dismissed the Youth Congress’s allegations, saying the film portrayed Nehru and Indira Gandhi as great leaders.

तमिल सिनेमा की दुनिया में अक्सर इतिहास और राजनीति के पहलुओं को लेकर फिल्में बनती रही हैं। ऐसी ही एक फिल्म हाल ही में रिलीज हुई है, जिसका नाम है ‘पराशक्ति’। इसमें तमिलनाडु के इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से, यानी 1960 के दशक के एंटी-हिंदी आंदोलन को दिखाया गया है।

इस आंदोलन में लोगों ने यह विरोध किया कि हिंदी को देश की एकमात्र आधिकारिक भाषा नहीं बनाया जाना चाहिए। फिल्म में इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दे को बड़े ही सजीव ढंग से पेश किया गया है। फिल्म का निर्देशन सुधा कोंगरा ने किया है, जो अपने मजबूत और समाज को संदेश देने वाले कंटेंट के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए फिल्म के बारे में बताया।

आईएएनएस से बात करते हुए सुधा कोंगरा ने कहा, ”फिल्म में कांग्रेस के नेता बिल्कुल भी गलत तरीके से नहीं दिखाए गए हैं। मैंने इन्हें सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेताओं के रूप में पेश किया है। खास तौर से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक महान नेता के रूप में दिखाया है। यह फिल्म दर्शकों को यह दिखाती है कि किस तरह इन नेताओं ने देश की राजनीति में लोकतंत्र और विश्वास के मूल्यों को बनाए रखा।”

बता दें कि कुछ दिन पहले तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि फिल्म में उनके नेताओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधा कोंगरा ने कहा, ”यह दावा पूरी तरह गलत है। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह वादा किया था कि जब तक दक्षिण भारत के लोग सहमत नहीं होंगे, हिंदी अकेली आधिकारिक भाषा नहीं बनेगी। फिल्म में मुख्य पात्र इस वादे की याद दिलाता है और दर्शकों को दिखाया जाता है कि लोग अपने नेताओं पर विश्वास करते थे और उनकी बातों पर भरोसा करते थे। इस तरह नेहरू को एक विश्वसनीय और महान नेता के रूप में पेश किया गया है।”

सुधा कोंगरा ने आगे कहा, ”फिल्म में इंदिरा गांधी को दिखाने का तरीका भी खास है। फिल्म में दिखाया गया है कि जब कुछ लोग मुख्य पात्र को रोकने की कोशिश कर रहे होते हैं, तब इंदिरा गांधी खुद बोलती हैं, ‘रुको!’ और आगे भाषण देती हैं। इस सीन से स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक नेता का काम सिर्फ आदेश देना नहीं होता, बल्कि लोगों की बात सुनना और सही निर्णय लेना होता है।”

उन्होंने कहा, ”नेहरू और इंदिरा गांधी दोनों ही अत्यंत सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेता थे। फिल्म में उन्हें किसी भी तरह से तानाशाह के रूप में नहीं दिखाया गया। हमने अपने दर्शकों को यह दिखाने की कोशिश की है कि ये नेता वास्तव में लोगों की भलाई और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थे।” फिल्म में शिवकार्तिकेयन और श्रीलीला मुख्य भूमिका में हैं, जबकि रवि मोहन खलनायक के रूप में हैं।

फिल्म को पोंगल के त्योहार के मौके पर 10 जनवरी को रिलीज किया गया।

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