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प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के पीएम क्रिस्टर्सन के बीच वार्ता, रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ा सहयोग

Talks between PM Modi and Swedish PM Kristersson, cooperation moves towards strategic partnership

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन की गुटेनबर्ग में हुई बैठक भारत-स्वीडन संबंधों के लिए एक अहम कदम साबित हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीडन के गुटेनबर्ग में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्‍फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस बैठक में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी शामिल हुईं और उन्होंने स्वीडन के राजा और रानी की तरफ से शुभकामनाएं दीं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताया और स्वीडन के राजा कार्ल गुस्ताफ को उनके 80वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। व‍िदेश मंत्रालय ने बताया क‍ि दोनों नेताओं ने भारत और स्वीडन के रिश्तों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और आपसी संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई। यह दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना गया।

नेताओं ने व्यापार और निवेश, तकनीक और नवाचार, हरित परिवर्तन (ग्रीन ट्रांज़िशन), अंतरिक्ष, नई उभरती तकनीकों, रक्षा और सुरक्षा, छोटे और मध्यम उद्योग, शोध और लोगों के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) की रणनीतिक साझेदारी और हाल ही में हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत नए अवसरों की पहचान करने पर भी सहमति जताई, ताकि दोनों देशों के लोगों को लाभ मिल सके।

जायसवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री उल्‍फ क्रिस्टर्सन ने भारत में डिजिटल बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हो रही प्रगति की सराहना की। उन्होंने स्वीडन में भारतीय समुदाय के सकारात्मक योगदान को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन को भारत की विकास यात्रा में और अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा में मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन, हरित बदलाव, टिकाऊ परिवहन, जीवन विज्ञान (लाइफ साइंसेज) और डिजिटल तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति का भी जिक्र किया, जो सुधारों, मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से आगे बढ़ रही है। उन्होंने स्वीडिश कंपनियों को भारत में और निवेश और विस्तार के लिए आमंत्रित किया। इसके लिए उन्होंने “मेक इन इंडिया”, राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन जैसे कार्यक्रमों और स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों का भी उल्लेख किया।

व‍िदेश मंत्रालय के अनुसार, आज भारत-स्वीडन का रिश्ता सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विचारों, तकनीक, नवाचार और मिलकर नए समाधान बनाने की साझेदारी बन चुका है। उन्होंने स्वीडिश कंपनियों के भारत के विकास में लंबे समय से दिए जा रहे योगदान की सराहना की और उनसे शोध, नवाचार, हरित बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में और गहराई से काम करने की अपील की।

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (ईयू) और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

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