February 3, 2025
National

उद्धव ठाकरे के ताने पर तारिक अनवर की सफाई, कहा- इससे पहले कांग्रेस ने अकेले कर्नाटक और तेलंगाना में हासिल की जीत

Tariq Anwar clarified on Uddhav Thackeray’s taunt, said- Before this, Congress had won in Karnataka and Telangana alone.

पटना, 9 अक्टूबर । हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के सहयोगी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी के मुखिया उद्धव ठाकरे ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि कांग्रेस जहां अकेले लड़ती है, वहां बीजेपी से हार जाती है, और जहां गठबंधन में लड़ती है, वहां प्रदर्शन बेहतर होता है। इस पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने प्रतिक्रिया दी है।

आईएएनएस से बात करते हुए अनवर ने कहा, “यह बात पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि हमने कर्नाटक और तेलंगाना में अकेले जीत हासिल की है। जहां हमें जरूरत है, वहां हम गठबंधन करेंगे। महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन है, और हमें उम्मीद है कि हम वहां जीतेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है क‍ि कांग्रेस अगर 100 साल तक भी सत्ता में रहेगी, तो भी दलितों और पिछड़ों का भला नहीं करेगी, यह उनकी बात है, लेकिन हम जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यों का क्या इतिहास है। एक दलित व एक आद‍िवासी राष्ट्रपति को राम जन्म भूमि पर बुलाया नहीं गया। इससे स्पष्ट है कि बीजेपी केवल नाम के लिए दलितों को पद पर रखती है, लेकिन उन्हें अध‍िकार व वास्तविक सुविधाएं नहीं देती।”

इसके बाद उन्होंने उस बात पर भी व‍िचार व्‍यक्‍त क‍िया, जिसमें उनकी पार्टी के नेताओं ने हरियाणा चुनावों में हार पर ईवीएम को इंगित किया। उन्होंने कहा, “ईवीएम पर सवाल उठते रहे हैं, और न केवल कांग्रेस, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस पर सवाल उठाया है। लोगों का ईवीएम पर विश्वास कम होता जा रहा है, जबकि हमारे देश में यह प्रणाली जारी है। इसका कारण क्या है? क्या बीजेपी चाहती है कि ईवीएम का इस्तेमाल जारी रहे? ऐसा लगता है कि इसके जरिए तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।”

बता दें कि हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई है। हरियाणा में जहां बीजेपी की एंटी इनकंबेंसी की वजह से कांग्रेस अपनी जीत लगभग पक्की मान रही थी, तो दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में भी पार्टी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रही थी। पार्टी का नतीजों में इसके उलट प्रदर्शन रहा। हरियाणा में पार्टी 90 में से 37 सीटें जीत कर बहुमत से दूर रही। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में तो पार्टी 90 में से सिर्फ 6 सीटें ही जीत पाई।

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