January 5, 2026
National

तेलंगाना: के कविता ने नई पार्टी की घोषणा की, विधानसभा में राजनीतिक ताकत बनकर लौटने का वादा

Telangana: K Kavitha announces new party, promises to return as a political force in the Assembly

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी कल्वकुंतला (के) कविता ने सोमवार को तेलंगाना विधान परिषद में अपने अंतिम भाषण के दौरान नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि जिस संगठन तेलंगाना जागृति की वह अध्यक्ष हैं, उसे अब एक राजनीतिक दल में बदला जाएगा।

कविता ने कहा कि पार्टी में उन्हें घोर अपमान सहना पड़ा, जिसके चलते उन्होंने बीआरएस से नाता तोड़ लिया। उल्लेखनीय है कि कविता को पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद उन्होंने सितंबर में विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा भी भेज दिया था। सोमवार को उन्होंने सदन में अपने इस्तीफे को स्वीकार करने की अपील की।

तेलंगाना आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक संगठन के रूप में स्थापित तेलंगाना जागृति को राजनीतिक दल के रूप में बदलने की घोषणा करते हुए कविता ने कहा कि वह भविष्य में एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में फिर से विधानसभा में लौटेंगी। उन्होंने कहा, “राज्य में एक नया राजनीतिक मंच उभर रहा है, जो छात्रों, बेरोजगारों और समाज के सभी वर्गों के लिए काम करेगा।”

जनता से आशीर्वाद की अपील करते हुए कविता ने कहा कि उन्हें जो अपमान सहना पड़ा, उसके कारण उन्होंने ‘पैतृक घर’ से सारे रिश्ते तोड़कर जनता के बीच आने का फैसला किया है। उन्होंने ऐलान किया कि तेलंगाना जागृति अगले चुनाव लड़ेगी और निश्चित रूप से एक बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरेगी।

के कविता ने कहा, “मैं आज विधानसभा से साधारण इंसान के रूप में जा रही हूं, लेकिन एक राजनीतिक ताकत बनकर वापस लौटूंगी।”

कविता ने आरोप लगाया कि उनके पिता के आसपास के कुछ लोगों ने उनके खिलाफ साजिश रची, जिसके चलते उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेला गया और अंततः पार्टी से बाहर कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी बीआरएस के भीतर पैदा हुई दरार का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेताओं द्वारा संपत्ति विवाद के कारण बीआरएस छोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए कविता ने कहा कि उनकी लड़ाई संपत्ति की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की है। उन्होंने दावा किया कि 2014 में तेलंगाना राज्य बनने के बाद जब उन्होंने बथुकम्मा उत्सव का आयोजन किया, तभी से उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने लगे और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया।

Leave feedback about this

  • Service