N1Live National दलबदल विरोधी कानून को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है : शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव
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दलबदल विरोधी कानून को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है : शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव

The anti-defection law has been completely weakened: Shiv Sena (UBT) leader Bhaskar Jadhav.

शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव ने पार्टी में चल रहे उथल-पुथल और ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर मीडिया से बातचीत की। भास्कर जाधव ने इस दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को हौसले से काम लेने की सलाह दी है।

भास्कर जाधव ने कहा, “जो होना है, वह तो होकर ही रहेगा और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को इसे लेकर बहुत ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। ये मुश्किल दिन भी गुजर जाएंगे, लेकिन इस दौर से निकलने के लिए हमें कुछ अभियान शुरू करने होंगे, कुछ फैसले लेने होंगे और स्पष्ट तौर पर भूमिकाएं तय करनी होंगी। मैं पार्टी प्रमुख से बस यही कहूंगा कि जो किस्मत में लिखा है, वह होकर ही रहेगा। बिल्कुल भी न डरें।”

भास्कर जाधव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पिछले दो सालों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि यूबीटी गुट टूट जाएगा और उद्धव ठाकरे के गुट के कुछ सांसद एक नया गुट बना सकते हैं। मैं इसकी सच्चाई के बारे में टिप्पणी नहीं कर सकता हूं, लेकिन जिन लोगों के नामों की चर्चा हो रही है, उन्हें कम से कम अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जब ​​आप केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में होते हैं, तो इससे लोगों के बीच आपकी विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है। अगर आप आज एक पार्टी और कल दूसरी पार्टी तोड़ते हुए दिखते हैं, तो आपकी सार्वजनिक छवि खराब होगी और समाज में आपकी प्रतिष्ठा गिरेगी।”

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, “जो लोग 15 साल तक किसी पार्टी में सांसद, विधायक और मंत्री रहे, वे सत्ता से हटने के बाद उस पार्टी में 15 दिन भी नहीं टिक पा रहे हैं। पश्चिम बंगाल को ही देख लीजिए, वहां भी ऐसी ही चीजें हुई हैं। वे पार्टी छोड़ने के अलग-अलग कारण बताते हैं। लोग विचारधारा या जनता के समर्थन के आधार पर नहीं, बल्कि सुविधा और आराम के लिए पार्टियां बदल रहे हैं। अगर कोई शांति से रहना चाहता है, तो उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है। यह लोगों को गुमराह करना है।”

भास्कर जाधव ने कहा, “पार्टी टूटने के कारण पहले ही बताए जा चुके हैं। जो लोग पार्टियां तोड़ते हैं, उन्हें कम से कम मन में जवाबदेही का एहसास तो होना चाहिए, भले ही उन्हें जनता के सामने शर्म न आए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को जो पत्र-व्यवहार मिला है, वह एक गौण मुद्दा है। मुख्य चिंता यह है कि दलबदल विरोधी कानून को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है। जनता के जनादेश की रक्षा के लिए बने कानून को अब असल में कमजोर किया जा रहा है और उसका उल्लंघन किया जा रहा है।”

वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर शिवसेना एमएलसी और प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ या ऐसी कोई चीज़ नहीं है। ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं है। हालांकि, अगर कुछ लोग अपनी लीडरशिप से नाखुश हैं या पार्टी के साथ उनके मतभेद हैं, तो यह एक अलग बात है।”

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