हरियाणा सरकार गुरुग्राम, जिंद और कुरुक्षेत्र के जिला अस्पतालों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से मशीनीकृत सफाई और स्वच्छता सेवाएं शुरू करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण रोगी देखभाल क्षेत्रों में विश्व स्तरीय स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करना और एक सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक रोगी-अनुकूल अस्पताल वातावरण बनाना है।
इन तीनों अस्पतालों में मशीनीकृत सफाई और स्वच्छता सेवाओं पर सालाना लगभग 3 से 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ और स्वास्थ्यकर अस्पताल का वातावरण बनाए रखना रोगी सुरक्षा, संक्रमण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल परिणामों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यंत्रीकृत सफाई प्रणाली अस्पताल परिसर में एकसमान और कुशल स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद करेगी, साथ ही मरीजों के समग्र अनुभव को भी बेहतर बनाएगी। अस्पताल अधिकारियों को शौचालयों, वार्डों, गलियारों, प्रतीक्षा कक्षों, गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू), आपातकालीन विभागों, ऑपरेशन थिएटरों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) इकाइयों में स्वच्छता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
एसीएस हेल्थ ने अधिकारियों को मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करने और हाउसकीपिंग सेवाओं की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए स्वच्छता कर्मियों की इष्टतम तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिक भीड़भाड़ वाले और गहन देखभाल वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां स्वच्छता मानक सीधे तौर पर रोगी सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा, “अस्पताल का स्वच्छ वातावरण न केवल मरीजों के आराम और संतुष्टि में सुधार करता है, बल्कि स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित संक्रमणों को कम करने और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

