N1Live National हाईकोर्ट ने जारी किया फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को नोटिस
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हाईकोर्ट ने जारी किया फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को नोटिस

The High Court issued a notice to Vipul Amrutlal Shah, the producer of the film 'The Kerala Story 2: Goes Beyond'.

केरल हाईकोर्ट ने फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को लेकर दायर एक याचिका पर गुरुवार को फिल्म निर्माता विपुल अमृतलाल शाह को नोटिस जारी किया है। दरअसल, याचिका में फिल्म के सर्टिफिकेशन को चुनौती दी गई है और साथ ही फिल्म के शीर्षक से केरल शब्द हटाने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति पी.वी. कुनिहिकृष्णन की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह याचिका अब अप्रासंगिक हो गई है, क्योंकि फिल्म पहले ही रिलीज हो चुकी है और इसे बड़ी संख्या में लोग देख चुके हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मामला अभी भी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि फिल्म केवल सिनेमाघरों में ही नहीं, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है, जिसके चलते इसका प्रभाव लगातार बना हुआ है और लोग इसे अभी भी देख रहे हैं।

फिल्म का कंटेंट केरल की छवि को नुकसान पहुंचाता है और समाज में गलत संदेश फैलाता है। फिल्म में दिखाए गए कुछ हिस्से ऐसे हैं जो लोगों के बीच गलतफहमी पैदा कर सकते हैं और सामाजिक एकता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी आधार पर फिल्म के प्रमाणन पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म का कंटेंट भारतीय न्याय संहिता के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन करता है। फिल्म समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे मामलों को बढ़ावा दे सकती है।

इस याचिका में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को भी पक्षकार बनाने की मांग की गई है, क्योंकि फिल्म को इसी प्लेटफॉर्म पर 1 मई को रिलीज किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब फिल्म डिजिटल रूप से उपलब्ध है, तो प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी बनती है कि वह इसके कंटेंट पर ध्यान दे।

मामले में याचिकाकर्ता ने कुछ अतिरिक्त सबूत भी अदालत में पेश किए हैं। इनमें ओटीटी प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी को भेजा गया ईमेल और सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्क्रीनशॉट शामिल हैं। इन सबूतों के जरिए यह दावा किया गया है कि फिल्म को कुछ जगहों पर वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया जा रहा है और इससे कुछ समुदायों के खिलाफ नकारात्मक धारणा बन रही है।

यह पहली बार नहीं है, जब यह मामला अदालत में पहुंचा है। इससे पहले भी फिल्म की रिलीज को लेकर विवाद हुआ था और अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। उस समय जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने खुद को मामले से अलग कर लिया था। वहीं एक डिवीजन बेंच ने फिल्म पर लगी अस्थायी रोक हटा दी थी, जिसके बाद फिल्म रिलीज हो पाई।

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