हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण मामले में प्रतिवादियों को मुआवजे की राशि पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है, और बढ़ी हुई क्षतिपूर्ति का लाभ मांगने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि मुआवजे पर ब्याज के हकदार होने का मुद्दा पहले ही उच्च न्यायालय की समन्वय पीठ द्वारा यूनियन ऑफ इंडिया बनाम टेक राम और अन्य के मामले में 16 दिसंबर, 2025 को तय किया जा चुका है।
उस मामले में, अदालत ने सुंदर सिंह बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा करते हुए यह माना था कि भूमि अधिग्रहण कार्यवाही में दिए गए मुआवजे पर ब्याज देय है।
स्थापित कानूनी स्थिति का पालन करते हुए, उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर ली और प्रतिवादियों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार मुआवजे पर ब्याज की गणना करने के बाद बढ़ी हुई राशि जमा करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे बढ़ी हुई राशि को ब्याज सहित छह सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में जमा करें।

