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मानवाधिकार आयोग ने चंडीगढ़ में हीमोफीलिया की दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

The Human Rights Commission has issued directives to ensure the uninterrupted availability of hemophilia medicines in Chandigarh.

चंडीगढ़,26अगस्त: हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग ने चंडीगढ़ प्रशासन को सरकारी अस्पतालों में एंटी-हीमोफिलिक फैक्टर VIII तथा हीमोफीलिया के उपचार में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक दवाओं की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

ये सिफारिशें आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश ने हीमोफीलिया मरीजों की ओर से हरप्रीत सिंह और अभिनव गर्ग द्वारा दायर शिकायत संख्या 6046/30/2026 का निपटारा करते हुए कीं।

शिकायत में सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH), सेक्टर-32 तथा PGIMER, चंडीगढ़ में फैक्टर VIII और नॉन-फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी की बार-बार हो रही कमी का मुद्दा उठाया गया था, जिसके कारण तत्काल उपचार की आवश्यकता वाले मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

आयोग ने 15 मई, 2026 को मामले का संज्ञान लेते हुए GMCH-32 से रिपोर्ट मांगी थी। अस्पताल ने 27 जुलाई, 2026 की अपनी रिपोर्ट में आयोग को बताया कि फैक्टर VIII की 1,500 IU क्षमता वाली 200 शीशियां प्राप्त हो चुकी थीं, जबकि विभिन्न क्षमताओं की अन्य दवाओं की खरीद प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में थी। 500 IU की 700 शीशियों के लिए खरीद आदेश जारी किया जा चुका था, लेकिन उनकी आपूर्ति लंबित थी। वहीं 1,000 IU की 1,500 शीशियों की खरीद का मामला स्वीकृति के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान सचिव को भेजा गया था। अस्पताल ने यह भी बताया कि पहले खरीदी गई 250 IU की 200 शीशियां पहले ही इस्तेमाल हो चुकी थीं।

आयोग ने उल्लेख किया कि सरकारी पोर्टल के माध्यम से दवाओं की खरीद में कई औपचारिकताएं शामिल होती हैं, जिसके कारण विलंब हो सकता है। हीमोफीलिया के मामले में यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि रक्तस्राव की स्थिति में उपचार को सुरक्षित रूप से टाला नहीं जा सकता।

आयोग ने स्वास्थ्य सचिव, यूटी चंडीगढ़ को निम्नलिखित कदम उठाने की सिफारिश की है:

* विभिन्न क्षमताओं के फैक्टर VIII तथा हीमोफीलिया के उपचार में उपयोग होने वाली अन्य आवश्यक दवाओं की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना;
* लंबित खरीद, स्वीकृतियों और आपूर्ति की प्रक्रिया में तेजी लाना;
* हीमोफीलिया के उपचार की निरंतर एवं आपातकालीन प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखना; तथा
* यह सुनिश्चित करना कि फैक्टर VIII या अन्य आवश्यक दवाओं के अभाव में किसी भी हीमोफीलिया मरीज को उपचार से वंचित न होना पड़े।

एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण सिफारिश में आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को यह भी सलाह दी है कि आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक दवाओं की बाजार से तत्काल खरीद के लिए अलग से धनराशि का प्रावधान किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर ऐसी खरीद को सुगम बनाने के लिए नियमों में संशोधन किया जाए।

आयोग ने कहा कि हीमोफीलिया की गंभीरता को देखते हुए दवाओं की सुचारु और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए तथा खरीद प्रक्रिया उपचार के समय पर उपलब्ध होने में बाधा नहीं बननी चाहिए।

हीमोफीलिया एक दुर्लभ आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी विकार है, जिसमें रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों की कमी के कारण लंबे समय तक या अचानक रक्तस्राव हो सकता है। उपचार में देरी से जोड़ों को नुकसान, आंतरिक रक्तस्राव, विकलांगता और गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है। इसलिए हीमोफीलिया के मरीजों के लिए क्लॉटिंग फैक्टर कॉन्सन्ट्रेट की समय पर उपलब्धता चिकित्सकीय रूप से अत्यंत आवश्यक है।

आयोग ने अपने आदेश की प्रतियां मुख्य सचिव, यूटी चंडीगढ़; स्वास्थ्य सचिव, यूटी चंडीगढ़; निदेशक-प्रधान, GMCH-32 तथा शिकायतकर्ताओं को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।

द हेमोफिलिक वेलफेयर सोसायटी, चंडीगढ़ चैप्टर ने आयोग के इस आदेश का स्वागत करते हुए इसे हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार और जीवन के अधिकार की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। सोसायटी ने यूटी प्रशासन से आयोग की सिफारिशों को अक्षरशः और शीघ्र लागू करने की अपील की है।

मीडिया के लिए संपर्क:

हरप्रीत सिंह: 9814013875
अभिनव गर्ग: 9646587739

संलग्नक: शिकायत संख्या 6046/30/2026 में दिनांक 03.08.2026 के आदेश की प्रति

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