शिमला स्थित भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) ने आज हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें हिंदी के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व, प्रशासनिक कार्यों में इसके उपयोग और ज्ञान सृजन तथा समकालीन बौद्धिक विमर्श में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ फेलो डॉ. अनुराधा रतूड़ी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी का संदेश पढ़ा गया। अपने संदेश में जोशी ने हिंदी को भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने दैनिक कार्यालयीय कार्यों में सरल और प्रभावी हिंदी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। संदेश में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक संस्थान के रूप में, भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान नवी मुंबई में आयोजित हो रहे हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। यह भागीदारी हिंदी के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने और राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर चलाई जा रही पहलों के साथ संस्थान की सहभागिता को मजबूत करती है।
कार्यक्रम के दौरान, संस्थान के विभिन्न वर्गों के प्रतिभागियों ने हिंदी के विभिन्न आयामों और समकालीन समाज में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।
अपने अध्यक्षीय भाषण में, फेलो प्रोफेसर संजय भट्ट ने हिंदी के व्यापक बौद्धिक और सामाजिक आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा को केवल संचार के माध्यम के रूप में ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार और बौद्धिक विमर्श के एक मजबूत आधार के रूप में भी देखने की आवश्यकता है।

