सोनीपत स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (डीबीआरएएनएएलयू) ने शुक्रवार को अपने पहले संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन किया। दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रख्यात शिक्षाविद, शोधकर्ता, कानूनी विशेषज्ञ और लोक नीति के विद्वान एकत्रित हुए और उन्होंने सुशासन, लोकतंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), लैंगिक अध्ययन, लोक नीति और संवैधानिक कानून सहित समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना और अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान के नए अवसर पैदा करना था। समापन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति देविंदर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का शासन, समान अवसर और समावेशी विकास प्रत्येक लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं।
स्वतंत्रता के बाद से भारत की संस्थागत प्रगति पर विचार करते हुए, उन्होंने ई-गवर्नेंस पहलों के माध्यम से सामाजिक समावेशन और नागरिक-केंद्रित शासन में देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
कुलपति ने सम्मेलन में भाग लेने के लिए विश्वविद्यालय के निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करने के लिए अमेरिका के अटलांटा स्थित जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चार्ल्स हैंकला के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। भारत के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त करते हुए उन्होंने देश की अधिक बार यात्रा करने की इच्छा जताई और इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों और सरकारों के बीच विश्वास हर लोकतंत्र में सुशासन की नींव है।


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