स्थानीय अदालत के निर्देश पर जिला पुलिस अधिकारियों ने कथित अवैध हिरासत और पुलिस यातना के मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी है। बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत अदालत में प्रस्तुत एक आवेदन में, स्थानीय निवासी आशा यादव ने कहा कि एएसआई जयकिशन और कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों ने उसके पति दीपक का अपहरण कर लिया और उसे बिना किसी वैध कारण के रात भर पुलिस स्टेशन (शहर), महेंद्रगढ़ में पुलिस लॉक-अप में रखा।
अदालत के आदेश पर एएसआई जयकिशन और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 115, 127(2), 198 और 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-सह-उप-विभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट विक्रांत की अदालत ने स्थानीय पुलिस अधीक्षक (एसपी) को जांच की निगरानी करने और जांच करने के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
सूत्रों के अनुसार, डीएसपी (नारनौल), डॉ. कविता को इस मामले की जांच सौंपी गई है। यह मामला दीपक और हरीश नामक दो व्यक्तियों के बीच सड़क पर हुई झड़प से संबंधित है, जिनके दोपहिया वाहन 17 सितंबर को महेंद्रगढ़ के बालाजी चौक के पास आपस में टकरा गए थे।
दीपक ने बाद में अदालत को बताया कि हरीश के निर्देश पर उसे जबरन पुलिस स्टेशन में रखा गया था। हरीश ने खुद को एक आईपीएस अधिकारी का कर्मचारी बताया था, जो वर्तमान में किसी अन्य जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात है। दीपक ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उसे प्रताड़ित किया।
“दीपक ने हरीश के खिलाफ लिखित शिकायत भी सौंपने की कोशिश की, जिसने अपने बॉस के नाम पर उसे खुलेआम धमकी दी थी। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उसकी शिकायत फाड़ दी और फिर सीआईए स्टाफ के एक पुलिस अधिकारी, उज्ज्वल ने उसके कपड़े उतारकर उसकी पिटाई की,” अदालत के आदेश में कहा गया है।
इस मामले में टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर, आईपीएस अधिकारी ने कहा कि उनके पास हरीश नाम का कोई कर्मचारी/रसोइया नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने अदालत के आदेशों से मेरा नाम उल्लिखित हिस्से को हटाने के लिए याचिका दायर की है।”

